Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की कुंजी है ! - जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी

सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की कुंजी है ! - जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी

गद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी द्वारा रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में किया मार्गदर्शन

जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी

फोंडा (गोवा) - 'कलियुग के चुनौतीपूर्ण काल में केवल भक्ति होना पर्याप्त नहीं है, अपितु समाज के प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं में विद्यमान सात्त्विकता को जागृत कर संगठित होना ही समय की मांग है ।

केवल मनुष्य जीवन में ही स्वयं का भाग्य बदलने का सामर्थ्य होता है, अतः उचित गुरु के मार्गदर्शन में कार्य करने से विश्वशांति का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है', ऐसा ओजस्वी मार्गदर्शन हिन्दू धर्मरक्षा हेतु अविरत कार्य करनेवाले रामानंदाचार्य दक्षिण पीठ, नाणीजधाम (रत्नागिरी) के जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने किया । जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने १३ जुलाई को रामनाथी, गोवा के सनातन संस्था के आश्रम से मंगलमय भेंट की । इस अवसर पर उन्होंने अपने मार्गदर्शन में समाज के उत्कर्ष का संदेश दिया ।

जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने कहा कि

१. हिन्दू धर्मियों को सभी भेद भूलकर एकत्रित होना आवश्यक है । हमारा तथा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का लक्ष्य (कार्य) एक ही है और वह है हिन्दू धर्म की रक्षा एवं उत्थान ।

२. कलियुग में रज एवं तम, इन गुणों का प्रभाव अपनेआप बढता है, उसके लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती । ये गुण मानवजीवन को पतन की ओर ले जाते हैं । इन गुणों का प्रभाव नष्ट कर सात्त्विकता बढाने के लिए समाज को 'साधना' करना अनिवार्य है ।


महान संत-महात्माओं की भेंट !

 सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी को सम्मानित करते जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की प्राणशक्ति अत्यल्प होते हुए भी उन्होंने जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी से भेंट की तथा कार्य के लिए उनसे आशीर्वाद लिए ।

सनातन संस्था के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार ।

१. प.पू. डॉ. आठवलेजी अंतर्बाह्य सत्पुरुष हैं तथा उनके मार्गदर्शन में सनातन के साधक संपूर्ण विश्व में विश्वशांति का असामान्य कार्य कर रहे हैं । यह कार्य अन्य किसी भी संप्रदाय को इतनी सहजता से संभव नहीं हुआ है, क्योंकि यहां गुरुतत्त्व को प्रधान माना जाता है तथा अनुशासित पद्धति से साधना की जाती है ।

२. आप सभी साधक पुण्यात्माएं हैं, इसिलिए इस जन्म में आपको प.पू. डॉ. आठवलेजी के रूप में रत्न प्राप्त हुआ है ।

३. प.पू. डॉ. आठवलेजी की ओर से प्रक्षेपित होनेवाले स्पंदनों के कारण ही साधकों की आध्यात्मिक प्रगति हो रही है ।

४. आश्रम में विद्यमान स्पंदन आत्मचैतन्य की ओर ले जानेवाले हैं तथा यहां के साधकों में भी यह चैतन्य (सात्त्विकता) दिखाई दे रहा है ।

५. साधक प.पू. डॉ. आठवलेजी का आज्ञापालन करें, जिससे उनके जीवन का कल्याण होगा । (१५.७.२०२६) ॐसच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी को सम्मानित करते जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Sanatan Prabhat Hindi