' सुराज्य अभियान ' ने ५ पत्रकार परिषदें आयोजित कर राज्यभर में दिया निवेदन !
जलगांव में पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए सुराज्य अभियान के ( बाएं से ) यशवंत चौधरी तथा दुर्गाप्रसाद पाटील ।मुंबई - ' महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल ' के जालस्थल ( वेबसाइट ) पर उपलब्ध बसस्थानकों के संपर्क क्रमांक बडी मात्रा में बंद होने का प्रकरण सामने आया है । कुछ स्थानों पर क्रमांक चालू होने पर भी कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं होता । हिन्दू जनजागृति समिति के ' सुराज्य अभियान ' ने इस विषय को प्रखरता से उठाया है । इस गंभीर समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने हेतु १३ मार्च को अभियान ने सातारा, सांगली, सिंधुदुर्ग, जलगांव एवं अकोला नगरों में पत्रकार परिषदें आयोजित कीं ।
सुराज्य अभियान की अकोला स्थित पत्रकार परिषदइनके माध्यम से एस्.टी. प्रशासन के अव्यवस्थित कार्यभार को उजागर किया गया । इन नगरों के साथ ही नाशिक, पुणे, सोलापूर, कोल्हापूर, मुंबई, नागपूर, अमरावती तथा गढचिरोली के विभाग नियंत्रकों को भी परिवाद ( शिकायत ) युक्त निवेदन सौंपा गया । यह निवेदन परिवहन मंत्री तथा महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल के अध्यक्ष श्री. प्रताप सरनाईक के नाम प्रेषित किया गया है, जिसमें यात्रियों की इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की गई है ।
सुराज्य अभियान की सिंधुदुर्ग स्थित पत्रकार परिषदअत्यधिक अनुवर्तन ( फॉलो-अप ) के उपरांत भी यात्रियों की समस्याओं के प्रति प्रशासन उदासीन क्यों ?
राज्य परिवहन महामंडल के जालस्थल पर दिए गए अधिकांश संपर्क क्रमांक निरंतर बंद रहते हैं अथवा चालू होने पर भी उनसे कोई उत्तर नहीं मिलता । ' सुराज्य अभियान ' ने इस विषय में प्रत्यक्ष सत्यापन कर सतत प्रयास किया; किंतु इतने प्रयासों के पश्चात भी आगार ( डिपो ) अथवा स्थानक स्तर पर स्थिति यथावत बनी हुई है ।
सुराज्य अभियान की सातारा स्थित पत्रकार परिषदसुराज्य अभियान द्वारा किए गए प्रयासों का लेखा-जोखा !
१. १६ दिसंबर २०२५ : परिवहन मंत्री, राज्य परिवहन महामंडल के अध्यक्ष तथा परिवहन आयुक्त को ई-मेल द्वारा प्रथम पत्र भेजा गया ।
२. १७ दिसंबर २०२५ : महाप्रबंधक ( यातायात ) ने ३१ विभाग नियंत्रकों को ' ई-मेल ' द्वारा आदेश निर्गत किए ।
३. तदुपरांत कुछ दिनों पश्चात : ' सुराज्य अभियान ' द्वारा राज्य के विभिन्न बस स्थानकों, आगार प्रबंधकों एवं विभाग नियंत्रकों को प्रत्यक्ष निवेदन सौंपा गया ।
४. २० फरवरी २०२६ : ' सुराज्य अभियान ' ने स्मरण-पत्र ई-मेल किए । ' की गई कार्यवाही के विषय में विभाग एवं आवेदक को सूचित करें ' , ऐसा आह्वान किया गया ।

संपर्क क्रमांक सत्यापन के चौंकाने वाले आंकडे ! ' सुराज्य अभियान ' के प्रत्यक्ष सत्यापन से जो आंकडे सामने आए हैं, वे यात्रियों की चिंता बढाने वाले हैं । १. जांचे गए बस स्थानक तथा आगार संपर्क क्रमांक : ४१३ २. चालू अथवा प्रत्युत्तर प्राप्त क्रमांकों की संख्या : ११७ ( २८ प्रतिशत ) ३. बंद अथवा निरुत्तरित क्रमांकों की संख्या : २९६ ( ७२ प्रतिशत ) |
सुविधाओं हेतु प्रदत्त निधि उत्तरदायी अधिकारियों से ब्याज सहित जमा क्यों न की जाए ? - सुराज्य अभियान इस संदर्भ में सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री. अभिषेक मुरुकटे ने ' सनातन प्रभात ' को बताया कि विगत तीन मासों से हम इस समस्या के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं ; किंतु प्रशासनिक अधिकारी केवल कागजी कार्यवाही कर रहे हैं तथा यात्रियों की असुविधा यथावत बनी हुई है । बसस्थानक के दूरभाष एवं संपर्क सूत्र हेतु, साथ ही जालस्थल के रखरखाव हेतु प्रतिमाह निश्चित निधि स्वीकृत की जाती है, तो यह धन कहां जाता है ? यदि यात्रियों को यह सुविधा ही प्राप्त नहीं हो रही, तो इस संदर्भ में वर्षों से व्यय की गई राशि संबंधित उत्तरदायी अधिकारियों से ब्याज सहित क्यों न जमा की जाए ? ऐसा सीधा प्रश्न उन्होंने उपस्थित किया । |
सुराज्य अभियान की सांगली स्थित पत्रकार परिषदप्रशासनिक उत्तरदायित्व निश्चित करें !
१. आधिकारिक भ्रमणभाष ( मोबाइल ) क्रमांक उपलब्ध कराएं : मात्र बंद लैंडलाइन का तकनीकी कारण अब न दिया जाए, अपितु विकल्प के रूप में प्रत्येक बस स्थानक एवं आगार हेतु आधिकारिक भ्रमणभाष क्रमांक त्वरित उपलब्ध कराए जाएं । उनकी जानकारी जालस्थल पर प्रदान की जाए ।
२. कठोर प्रशासनिक कार्रवाई करें : जानबूझकर दूरभाष न उठाने वाले अथवा आधिकारिक क्रमांक निष्क्रिय रखने वाले उत्तरदायी कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर इसे ' सेवा-त्रुटि ' मानकर उनके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए ।
३. पाक्षिक अंतराल पर क्रमांकों का सत्यापन करें : प्रत्येक १५ दिनों में बस स्थानक के होने वाले ' डीप क्लीनिंग इंस्पेक्शन ' ( गहन स्वच्छता निरीक्षण ) में केवल स्वच्छता का ही नहीं, अपितु ' संपर्क प्रणाली ' की स्थिति का सत्यापन करना अनिवार्य किया जाए ।
विषय की गंभीरता को देखते हुए विभाग नियंत्रकों के माध्यम से परिवहन मंत्री को यह शिकायत युक्त निवेदन प्रेषित किया गया है तथा शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा है, ऐसा भी मुरुकटे ने कहा ।
संपादकीय भूमिका महाराष्ट्र एस्.टी. प्रशासन का शिथिल ( निम्नस्तर का) कार्यभार ! इसी लाचार व्यवस्था का लाभ निजी बस संस्थाएं उठा रही हैं । निजी बसों से यात्रा सुलभ हो, इसके लिए उनकी संपर्क व्यवस्था इतनी सुदृढ होती है कि उनकी तत्पर सेवा के कारण नागरिक निजी बसों से ही यात्रा को प्राथमिकता देने लगे हैं । यह एस्.टी. प्रशासन के लिए अत्यंत लज्जास्पद है ! |

