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लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) - उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दल (ATS) ने २ अप्रैल को यहां कार्रवाई करते हुए ४ आतंकवादियों को बंदी बनाया बनाया है ।
३ अप्रैल को यह उजागर किया गया । ये सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं एवं इन्हें पाकिस्तान से आतंकी आक्रमण करने के निर्देश मिल रहे थे । अब तक यह भी उजागर हुआ है कि इन लोगों ने भारत में कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं भी की थीं ।
ये आरोपी 'टेलीग्राम', 'इंस्टाग्राम' एवं 'सिग्नल' जैसे सुरक्षित माने जाने वाले सामाजिक माध्यमों का उपयोग करके पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के संपर्क में थे । ये चारों देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं, रेलवे स्थानकों एवं ट्रेनों में विस्फोट करने की तैयारी कर रहे थे । इनकी पहचान साकिब उर्फ 'डेविल', अरबाब, विकास गहलावत उर्फ रौनक एवं लोकेश उर्फ बाबू उर्फ पपला पंडित के रूप में हुई है ।
जांच में उजागर हुए महत्वपूर्ण बिंदु
१. आतंकवादियों से रसायन से भरा एक कैन, ७ मोबाइल भ्रमण भाष, २४ पोस्टर एवं आधार कार्ड हस्तगत किए गए हैं । २ अप्रैल को इनकी लक्ष्मणपुरी रेलवे स्थानक को उडाने की योजना थी, किन्तु समय रहते पुलिस को जानकारी मिल जाने से बडी घटना टल गई ।
२. साकिब इस गिरोह का सरगना था । वह मेरठ जिले के अगवानपुर गांव का निवासी है एवं बाल काटने का काम करता है । वह सामाजिक माध्यम से पाकिस्तान के 'हैंडलर्स' (आतंकी समन्वयकों) के संपर्क में आया ।
३. टेलीग्राम, इंस्टाग्राम एवं सिग्नल के माध्यम से वह पाकिस्तान के गिरोह, कट्टरपंथी समूहों एवं अफगानिस्तान के कुछ संदिग्ध भ्रमणभाषों से जुडा था । उसने अपने ही गांव के अरबाब को भी इस गिरोह में सम्मिलित किया । उसके उपरांत उसने गौतम बुद्ध नगर के विकास गहलावत उपनाम रौनक एवं लोकेश को भी जोड लिया ।
४. ये सभी आरोपी पैसों के लालच एवं कट्टरपंथी प्रभाव में आकर इस साजिश का हिस्सा बने । उन्होंने भिन्न-भिन्न स्थानों का गुप्तरूप से निरीक्षण किया एवं अन्य गतिविधियों में लगे थे ।
५. इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य भारत में भय एवं अस्थिरता का वातावरण निर्माण करना था । उन्होंने गाजियाबाद उपरांत, अलीगढ एवं लक्ष्मणपुरी जैसे नगरों में कई स्थानों का गुप्तरूप से निरीक्षण किया था ।
६. गिरोह के सदस्य छोटी-छोटी आगजनी की घटनाएं कर उनके लघु चलचित्र बनाकर पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को भेजते थे, जिससे उनका विश्वास जीत सकें । इसके बदले उन्हें पैसे मिलते थे ।
७. चारों को उत्तेजित करने के लिए उन्हें धर्म के नाम पर हिंसा एवं आगजनी के लिए प्रेरित किया जा रहा था ।
संपादकीय भूमिका
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