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देश हित में नहीं.', UGC Act पर बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान, सांसद करन भूषण ने भी दिया 'क्लियर' जवाब - Sanjeevni Today

देश हित में नहीं.', UGC Act पर बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान, सांसद करन भूषण ने भी दिया 'क्लियर' जवाब - Sanjeevni Today

खनऊ/गोंडा, 29 जनवरी 2026: कैसरगंज के पूर्व सांसद और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम, 2026' (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) पर जोरदार विरोध जताया है।

उन्होंने इन नियमों को समाज में भेदभाव बढ़ाने वाला और देश के हित में नहीं बताया है।

बृजभूषण शरण सिंह ने इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक वीडियो में कहा, 'यूजीसी का नया नियम समाज में भेदभाव को बढ़ावा देगा, ये देश के हित में नहीं है। इस नियम को तत्काल वापस लिया जाए।' उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि ये नियम वापस नहीं लिए गए तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा, जिसमें केवल सवर्ण वर्ग ही नहीं, बल्कि ओबीसी, एससी और अन्य प्रबुद्ध वर्ग के लोग भी शामिल होंगे।

पूर्व सांसद ने कहा कि कई दिनों से यूजीसी (UGC Act 2026) पर विवाद चल रहा है। नए नियमों में सवर्ण छात्रों द्वारा किसी घटना के होने पर कार्रवाई और ओबीसी तथा एससी वर्ग के छात्रों के संरक्षण की बात कही गई है, जिससे देश में बड़ी भ्रामक स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने दावा किया कि ये नियम समाज को बांटने वाले हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों में एकतरफा भेदभाव को बढ़ावा देंगे।

विवाद का मूल क्या है?

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ये नए विनियम अधिसूचित किए थे, जो 2012 के पुराने नियमों की जगह लेते हैं। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना है, खासकर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ। नियमों में 'जाति-आधारित भेदभाव' को एससी, एसटी और ओबीसी सदस्यों के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर होने वाली भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है। संस्थानों में इक्विटी कमेटी गठित करने, शिकायतों की जांच और दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

हालांकि, इन नियमों पर सवर्ण समुदाय से व्यापक विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं, क्योंकि सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों पर कोई स्पष्ट संरक्षण नहीं है और फर्जी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया है। इससे कैंपस में तनाव बढ़ सकता है।

भाजपा में भी असहमति की आवाजें

बृजभूषण शरण सिंह के बेटे और वर्तमान कैसरगंज सांसद करण भूषण ने भी इन नियमों से दूरी बनाते हुए कहा है कि संसदीय समिति का इनके निर्माण में कोई रोल नहीं था और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इन्हें संशोधित या वापस लिया जाना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने भी इन नियमों को असंवैधानिक बताते हुए वापसी की मांग की है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि कोई भी भेदभाव नहीं होगा और नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में भी इन नियमों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जहां सुनवाई जारी है।

Author: DIYA Reporter


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