Wednesday, 08 May, 8.36 pm संजीवनी टुडे

होम
इंडिया हैबिटेट सेंटर का 14वां फिल्म फेस्टिवल 17 मई से

नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर द्वारा आयोजित होने वाले फ़िल्म फेस्टिवल का 14वां संस्करण 17 मई से शुरू होगा। यह फेस्टिवल 26 मई तक चलेगा। फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत अश्विन कुमार की फिल्म 'नो फ़ादर इन कश्मीर' से होगी, जबकि समापन देवाशीष मुखर्जी की 'भोंसले' से होगी। साल-दर-साल भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ओर पहुंचते हुए यह संस्करण आपको पेन इंडिया द्वारा चयनित निर्देशकों से फ़िल्म प्रदर्शन के बाद चर्चाओं का अवसर प्रदान करेगा।

19 भाषाओं में 42 फिल्म होगी प्रदर्शित

फेस्टिवल में 19 से ज़्यादा भाषाओं की 42 फ़िल्में प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें मराठी, बंगाली, मलयालम, हिंदी, कश्मीरी, अंग्रेजी, तेलुगु, हरियाणवी, पंजाबी, असमी, कन्नड़, खासी, गद्दी, रावुला, गारो, शेरडुकपेन, लद्दाखी, कुमाउंनी और संथाली शामिल हैं। डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट्स और स्टूडेंट फ़िल्म सेगमेंट के तहत समीक्षकों द्वारा सराही गई 45 अतिरिक्त फ़िल्मों की स्क्रीनिंग भी की जाएगी।

प्रदर्शित फिल्मों में वाडा चेन्नई, कुम्बलंगी नाइट्स, नगरकीर्तन, द मॉस्किटो फिलॉसफी, मेहसमपुर, नोबेलमैन, तारीख़, दी गोल्ड लेडन शिप एंड द सेक्रेड माउंटेन, जॉनकी, लोर्नी - द फ्लेनुर, बारम, अभ्यक्तो, डेथ ऑफ एन इन्सेन और अन्य फिल्में शामिल हैं, जिनकी स्क्रीनिंग के बाद उनके निर्देशकों से उस पर परिचर्चा भी आय़ोजित की जाएगी। फेस्टिवल में प्रदर्शित सभी फिल्मों में अंग्रेजी सबटाइटल होंगे। अहा रे' फ़िल्म की जानी-मानी अदाकारा ऋतुपर्णा सेन गुप्ता और फ़िल्म 'आभासम' की अदाकारा रीमा कल्लिंगल भी इस फ़िल्म फेस्टिवल में शामिल होंगी|

समारोह में फ़िल्म निर्माताओं द्वारा मास्टर क्लास और फिल्मों से संबंधित मुद्दों पर परिचर्चा भी आयोजित की गई है। फ़िल्म आभासम की स्क्रीनिंग के बाद #मीटू मूवमेंट पैनल और वुमन इन सिनेमा कलेक्टिव सत्र में मलयालम फ़िल्म अभिनेत्री रीमा कल्लिंगल, डायरेक्टर जुबिथ नाम्रदाथ भाग लेंगे।

फेस्टिवल में डॉक्यूमेंट्रीज के साथ-साथ शॉर्ट मूवीज और छात्रों द्वारा बनाई फिल्मों की साझेदारी भी बढ़ने लगी है। दादासाहेब फाल्के सम्मान से सम्मानित, निर्देशक सविता ओबेरॉय द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्रीज को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

पीएसबीटी फिल्म्स के डॉक्यूमेंट्री सेगमेंट का मुख्य आकर्षण होगी प्रतीक बासु की फिल्म रंग महल, जिसे 69वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के तहत चुना गया था। हैबिटेट फ़िल्म फेस्टिवल में बहुत से प्रतिभाशाली छात्रों की भी फ़िल्में प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें द फायरफॉक्स गार्जियन, ग्लो वर्म इन ए जंगल, खेला, व्हाट इज द कलर ऑफ़ कलरलेस स्काई इत्यादि शामिल हैं।

इस अवसर पर इंडिया हैबिटेट सेंटर की प्रोग्राम निदेशक का कहना है 'हैबिटेट फ़िल्म फेस्टिवल फिल्मों के वैविध्यपूर्ण चुनाव के लिए जाना जाता है। पिछले 14 सालों से, यह भारत की बेहतरीन फ़िल्में प्रस्तुत कर रहा है, ऐसी फ़िल्में जो सामाजिक और स्थानीय संदर्भों से गहराई से जुड़ी रहती हैं, जिनमें गहन समझ और संवेदनशीलता होती है। यह चयन हमारे चरित्र की विविधता को पुष्ट करता है| फ़िल्में हमेशा से समुदाय को करीब लाने का मजबूत माध्यम रही हैं, और हम एक बार फिर से भारत की श्रेष्ठ फ़िल्में प्रस्तुत करते हुए रोमांचित हैं।'

उल्लेखनीय है कि 2005 में अपनी शुरुआत के साथ, हैबिटेट फिल्म फेस्टिवल ने प्रत्येक वर्ष नियत बढ़त हासिल की है और इसने बॉलीवुड की चमक-धमक से परे, बड़े पैमाने पर आमजन का ध्यान सिनेमा के परिष्कृत रत्नों की तरफ आकर्षित किया है।

Dailyhunt
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Dailyhunt. Publisher: Sanjeevnitoday
Top