Thursday, 16 Jul, 8.35 pm सन्मार्ग लाइव

खेल
रिजिजू ने खेल गतिविधियां शुरू करने का फैसला राज्यों पर छोड़ा

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (सन्मार्ग) केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कोरोना संकट के बीच खेल गतिविधियों और प्रशिक्षण को शुरू करने का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया है। कोरोना के कारण देश में तमाम खेल गतिविधियां बंद हैं।
रिजिजू ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के युवा मामलों और खेल विभागों के प्रभारी मंत्रियों और अधिकारियों के साथ दो दिवसीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। कॉन्फ्रेंस बुधवार को समाप्त हुई जिसमें रिजिजू ने 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा मामले एवं खेल विभाग के मंत्रियों के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद किया। बैठक में कोविड-19 के पश्चात खेलों की बहाली पर चर्चा की गयी। खेल मंत्री ने राज्यों में खेल गतिविधियों को फिर से शुरू किए जाने की संभावनाओं पर कहा, 'राज्यों को स्वतंत्र रूप से यह फैसला लेना होगा कि वे खेल गतिविधियां और प्रशिक्षण कब शुरू कर सकते हैं। हालांकि मैं सभी राज्यों से 2-3 महीनों के बाद हालात को देखते हुए कुछ खेल गतिविधियां शुरू करने का अनुरोध करूंगा।'
उन्होंने कहा, 'हम सीमित रूप से और गैर अनुबंधित खेलों के लिए खेल कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। ऐसे कुछ राज्य हैं, जिन्होंने अपने खेल केन्द्रों को खोल दिया है और कुछ खेल प्रशिक्षण शुरू कर दिए हैं। हालात सुधरने के साथ हमें ऑन-फील्ड खेलों को फिर शुरू करने के प्रयास करने चाहिए।'
दो दिन की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों में से कई ने खेल गतिविधियां शुरू कर दी हैं, जबकि अन्य इसकी योजना बना रहे हैं। दिल्ली, सिक्किम, लक्षद्वीप, चंडीगढ़, गोवा पहले ही टेबिल टेनिस, बैडमिंटन, तीरंदाजी, शॉटपुट, भाला फेंक आदि गैर अनुबंधित खेलों से जुड़ी गतिविधियां शुरू कर चुके हैं। नागालैंड फुटबाल और स्वदेशी खेलों में जिला स्तर की प्रतिस्पर्धाएं शुरू करने योजना बना रहा है। झारखंड की सितंबर से खेल शुरू करने की योजना है, वहीं अरुणाचल प्रदेश, बिहार और मिजोरम खेल शुरू करने के लिए एसओपी तैयार कर रहे हैं।

रिजिजू ने कहा कि 'एक राज्य एक खेल' नीति का पालन करने के लिए राज्यों का पूर्ण समर्थन मिला है क्योंकि मंत्रियों और अधिकारियों ने एक खेल वाली नीति को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई है जिसमें उनका राज्य पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है। खेल मंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य में एक 'खेलो इंडिया स्टेट सेंटर एक्सीलेंस' (केआईएससीई) की स्थापना और 'एक राज्य एक खेल' नीति का पालन करने के लिए राज्यों का पूर्ण समर्थन मिला है क्योंकि मंत्रियों और अधिकारियों ने एक खेल वाली नीति को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई, जिसमें उनका राज्य पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है।
खेल मंत्री ने कहा, 'हमारा मंत्रालय एक या दो खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए राज्यों को सहायता प्रदान करेगा और उन्हें धन उपलब्ध कराएगा। केआईएससीई किसी विशेष खेल के लिए नोडल केंद्र बन जाएगा, जहां पर एथलीटों को ओलंपिक के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं में तैयार किया जा सकता है। राज्यों द्वारा पारंपरिक खेलों सहित अन्य खेलों में एथलीटों को प्रशिक्षित करने का विकल्प भी चुना जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से ध्यान केवल एक या दो खेलों पर ही होना चाहिए।'
राज्यों के प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के सभी जिलों में 1000 'खेलो इंडिया केंद्र' की स्थापना करने से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं का सदुपयोग करने में मदद मिलेगी बल्कि देश में खेल की संस्कृति भी विकसित होगी। कई राज्यों ने जमीनी स्तर के खेलों को बढ़ावा देने में अपनी सफलता की कहानियों को साझा किया गया।
कॉन्फ्रेंस के दौरान रिजिजू ने कोविड-19 के इस दौर में फिट इंडिया मूवमेंट की प्रासंगिकता पर भी बात की क्योंकि वायरस को हराने में स्वस्थ रहना और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना दो अहम कारक हैं। उन्होंने कहा, 'मैं सभी राज्यों से कोविड के दौरान फिट इंडिया गतिविधियों को जारी रखने और फिटनेस से संबंधित गतिविधियों में आम लोगों को जोड़ने का अनुरोध करता हूं। फिट इंडिया स्कूलों के रूप में स्कूलों के नामांकन से विद्यार्थियों के लिए स्वस्थ रहने को जीवन का एक तरीका बनाने में सहायता मिल सकती है।'

रिजिजू ने कहा कि 'फिट इंडिया अभियान' से संबंधित गतिविधियों में राज्यों की भागीदारी उत्साहजनक रही है जिसमें पूरे भारत के 2.5 लाख से ज्यादा स्कूलों ने 'फिट इंडिया स्कूल' बनने के लिए अपना नामांकन करवाया है। उन्होंने कहा, 'मैं सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह करता हूं कि वे अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूलों को फिट इंडिया स्कूल के रूप में पंजीकरण कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं जिससे युवाओं के लिए फिटनेस उनके जीवन का एक तरीका बन जाए।'
खेल मंत्री ने कहा कि फिट इंडिया स्कूल के रूप में स्कूल की पात्रता के लिए कई मानदंड हैं, लेकिन इनमें से दैनिक पाठ्यक्रम में फिटनेस गतिविधियों को शामिल करना एक अनिवार्य कदम है। रोजाना फिटनेस से स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़े स्तर पर अपनी प्रतिरोधकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के बाद रिजिजू ने कहा, 'यह एक सार्थक सम्मेलन रहा है, जिसमें मंत्रियों और अधिकारियों ने खेल और युवा मामलों से संबंधित मुद्दों के संदर्भ में बहुत कुछ मूल्यवान सुझाव दिए हैं। उन्होंने मुझे कोविड के बाद की तैयारी के बारे में भी जानकारी प्रदान की जिसमें खेल संबंधित आयोजनों और एथलीटों के प्रशिक्षण की शुरुआत करने के तरीके भी शामिल है। राज्यों द्वारा बहुत ही अच्छा काम किया जा रहा है और मंत्रालय उनके साथ निकटता से समन्वय कर रहा है। मुझे यकीन है कि हम भविष्य के लिए एक रोडमैप सामने लेकर आएंगे।'
राज
सन्मार्ग

Dailyhunt
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Dailyhunt. Publisher: Sanmarg Live
Top