केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री और ओडिशा के वरिष्ठ बीजेपी नेता जुएल ओराम ने पार्टी के भीतर अपने खिलाफ साजिश का गंभीर आरोप लगाया है। सुंदरगढ़ से छह बार के सांसद ओराम ने कहा कि कुछ लोग पैसे खर्च करके उनकी छवि खराब करने के लिए अभियान चला रहे हैं और उनका मकसद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटवाना है।
'मुझे बदनाम करने के लिए पैसा खर्च किया जा रहा'
ओराम ने कहा कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने के लिए पैसा खर्च कर रहे हैं और उनके खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चला रहे हैं। उनके अनुसार, साजिश रचने वालों को लगता है कि अगर उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया जाता है तो उनके लिए मंत्री बनने का रास्ता खुल जाएगा।ओराम ने कहा कि उन्होंने बीजेपी के लिए अपना खून-पसीना दिया है और पार्टी ने वर्षों से उन्हें पद, जिम्मेदारी और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारियों से संतुष्ट हैं, लेकिन उनकी छवि खराब करने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करेंगे।'हाथ काटकर फेंकने की ताकत रखता हूं'
अपने खिलाफ कथित अभियान चलाने वालों को चेतावनी देते हुए ओराम ने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा तो उनमें उसके 'हाथ काटकर फेंक देने' की ताकत है। उन्होंने राजनीतिक तौर पर भी अपने विरोधियों को चुनौती दी।बीजेपी के संगठन महामंत्री से की शिकायत
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत बीजेपी के संगठन महामंत्री मानस मोहंती के सामने रख दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राज्य स्तर पर अगर इस मामले का समाधान नहीं हुआ और उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने भी यह मुद्दा उठाएंगे।ओराम ने आरोप लगाया कि दूसरे दलों से बीजेपी में आए कुछ नेता उनकी स्थिति कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया है।राउरकेला में सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा विवाद
ओराम के इन आरोपों की पृष्ठभूमि में राउरकेला का सर्किट हाउस विवाद भी महत्वपूर्ण है। उनके बयान से एक दिन पहले राउरकेला पुलिस ने उनके प्रतिनिधि प्रकाश पासवान को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, पासवान ने सर्किट हाउस में सात लोगों के लिए कमरे बुक कराए थे। बाद में इन लोगों को हथियार और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया गया। पासवान पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउस में अपराधियों को ठहरने में मदद की। हालांकि, पासवान ने इन आरोपों से इनकार किया है। इससे पहले बीजेपी की ओडिशा इकाई ने उन्हें पार्टी से निलंबित भी किया था।इस पूरे मामले पर ओराम ने सोशल मीडिया पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अगर उनके प्रतिनिधि के खिलाफ आरोप साबित होते हैं तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने अपने खिलाफ झूठे और बदनाम करने वाले प्रचार पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।कौन हैं जुएल ओराम?
जुएल ओराम ओडिशा बीजेपी के पुराने और प्रभावशाली आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वह सुंदरगढ़ लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1998 में लोकसभा चुनाव जीता था। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान उन्हें जनजातीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 में उन्हें दोबारा केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। 2024 में भी वह मोदी सरकार में मंत्री बने और फिलहाल केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री हैं।ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के केंदुदीही गांव के एक गरीब आदिवासी परिवार में जन्मे ओराम ने 1982 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में नौकरी की थी। 1989 में वह पहली बार ओडिशा विधानसभा के लिए चुने गए और बाद में लोकसभा की राजनीति में आए।- 1998 से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद सुंदरगढ़ सीट पर उन्हें सिर्फ एक बार हार मिली। 2009 में कांग्रेस नेता और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री हेमानंद बिस्वाल ने उन्हें हराया था। इसके अलावा वह सुंदरगढ़ से हर लोकसभा चुनाव जीतते रहे हैं।
बीजेपी में अंदरूनी खींचतान का संकेत?
ओराम के आरोप ऐसे समय आए हैं जब उनके करीबी माने जाने वाले प्रकाश पासवान की गिरफ्तारी के बाद सुंदरगढ़ बीजेपी में हलचल की खबरें सामने आई हैं। इसलिए उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही संभावित राजनीतिक खींचतान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, ओराम ने किसी व्यक्ति का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है और बीजेपी ने भी अभी उनके दावों की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ओराम द्वारा लगाए गए 'मंत्रिमंडल से हटाने की साजिश' के आरोपों पर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और क्या पार्टी इस मामले की आंतरिक जांच कराती है।
