ऑटोमोबाइल उद्योग के शीर्ष संगठन सियाम (Society of Indian Automobile Manufacturers - SIAM) ने ईंधन (फ्यूल) में उच्च क्लोराइड और नमी की मौजूदगी को लेकर चिंता जताने वाला अपना पत्र वापस ले लिया है।
सियाम ने अपने पत्र में क्या दावे किए थे
सियाम ने 28 जुलाई को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) को एक पत्र भेजा था। इसमें वाहन निर्माण कंपनियों (OEMs) द्वारा खराब हुए पार्ट्स की जांच के आधार पर निम्नलिखित मुद्दे उठाए गए थे:
- क्लोराइड और नमी की मौजूदगी: ईंधन में क्लोराइड (Chloride) की अधिक मात्रा और नमी पाई गई है।
- वाहन के पुर्जों को नुकसान: इसके कारण गाड़ियों के फ्यूल पंप (Fuel Pump), फ्यूल इंजेक्टर (Fuel Injector) और ईजीआर वाल्व (EGR Valve) जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों में जंग (Corrosion) और खराबी के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
- E20 ईंधन की छवि पर असर: संगठन ने तर्क दिया था कि ईंधन की इस खराबी से ग्राहकों के मन में E20 ईंधन (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर गलत धारणा बन रही है।
- कड़े नियमों की मांग: सियाम ने सरकार से मांग की थी कि E20 ईंधन के मानकों में "क्लोराइड सीमा" को शामिल किया जाए और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) तथा रिटेल आउटलेट्स पर इसकी गुणवत्ता नियंत्रण की सख्त व्यवस्था की जाए।
SIAM ने पत्र वापस क्यों लिया?
सियाम ने मंगलवार देर शाम जारी अपने स्पष्टीकरण में बताया कि उसने पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजा गया पत्र वापस ले लिया है। इसके पीछे ये वजहें बताई हैं:- आंकड़ों के सत्यापन की ज़रूरत: संगठन का कहना है कि पत्र में शामिल कुछ आंकड़ों का देश के विभिन्न हिस्सों से विस्तृत डेटा जुटाकर सत्यापन (Authentication) किया जाना बाकी है, जिसके बाद ऑटोमेकर सदस्यों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा।
- सरकार के कदम: सियाम ने स्पष्ट किया कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल-पेट्रोल आपूर्ति श्रृंखला के लिए एथेनॉल में क्लोराइड/सल्फर की अधिकतम सीमा 3 PPM (पार्ट्स पर मिलियन) तय करने के दिशा-निर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं।
- आउटलेट्स पर जांच: तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने बताया है कि देश भर के 87,000 से अधिक पेट्रोल पंपों/आउटलेट्स पर दिन में 8 से 12 बार पानी (Water Ingress) की जांच की जा रही है।
E20 विवाद को समझिए
विवाद का मुख्य कारण यह है कि देश में सड़कों पर चलने वाली ज्यादातर गाड़ियां (विशेषकर 2023 से पहले की बीएस-3 और बीएस-4 गाड़ियां) E10 या नॉर्मल पेट्रोल के हिसाब से डिज़ाइन की गई हैं, न कि E20 के लिए। मुख्य विवाद इन प्वाइंट्स पर केंद्रित है:- माइलेज में गिरावट: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल के कारण वाहनों का माइलेज 2% से 6% तक कम हो सकता है।
- इंजन के पुर्जों को नुकसान की आशंका: एथेनॉल की प्रकृति पानी/नमी को आकर्षित करने की होती है और यह संक्षारक (corrosive) होता है। वाहन चालकों और विशेषज्ञों का आरोप है कि पुरानी गाड़ियों में इसके इस्तेमाल से फ्यूल पंप, फ्यूल इंजेक्टर, रबर की होस (पाईप) और गास्केट जल्दी खराब हो रहे हैं।
- विकल्प की कमी: पेट्रोल पंपों पर नॉर्मल या एथेनॉल-फ्री पेट्रोल का विकल्प खत्म कर दिया गया है, जिससे लोग मजबूरी में E20 का इस्तेमाल कर रहे हैं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।
राजनीतिक दलों और संगठनों का क्या कहना है?
इस मुद्दे पर पहल सोशल एक्टिविस्ट और राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने की। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी ई20 पेट्रोल का विरोध किया। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी और पुरानी गाड़ियों के आंकड़े समझे बिना E20 को पूरे देश पर थोप दिया है। उनका कहना है कि इससे आम जनता पर गाड़ियों के मेंटेनेंस और घटते माइलेज का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।सड़क विरोध व डिजिटल अभियान: 'E20 जनता पार्टी' और छात्र/युवा संगठनों ने इसके खिलाफ रैलियां निकाली हैं और सोशल मीडिया पर मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर बिना एथेनॉल वाला (Pure Fuel) पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए।
सरकार का रुख
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि लैब और रोड टेस्टिंग (ARAI और IIT कानपुर के अध्ययनों) में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि E20 से व्यापक रूप से इंजन फेलियर हो रहे हों। सरकार का तर्क है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत को 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, कच्चे तेल (Crude Oil) पर निर्भरता घटी है, किसानों की आय बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। सरकार के अनुसार, केवल 2016 से पहले की (BS-III) गाड़ियों में सर्विसिंग के दौरान रबर पार्ट्स/गास्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जो एक सामान्य प्रक्रिया है।क्या ये वाहनों के लिए वाकई सही नहीं है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका वाहन किस मॉडल/साल का है:- 2023 के बाद बने वाहन (E20 Compliant):
- 2023 से पहले की गाड़ियां (Non-E20 / Legacy Vehicles):
- कार के इंजन के आंतरिक कंपोनेंट्स सुरक्षित रहते हैं, लेकिन ईंधन तंत्र से जुड़ी पुरानी रबर की होस पाइप, सील और प्लास्टिक के पुर्जे समय के साथ सड़ या लीक हो सकते हैं।
सरकारी दावों के बावजूद कई सवाल
- E20 पर सबसे ज्यादा बयान नितिन गडकरी के क्यों आए
- विवाद बढ़ने पर ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्यों सफाई पेश की
- E20 प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले क्या कार निर्माता कंपनियों से पूछा गया
- अगर पूछा गया तो ऐसी बैठकों की कार्यवाही वाहन उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दी गई
- कार निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम ने पहले तथ्य बताए फिर आरोपों को क्यों वापस लिया
- सियाम और कार निर्माताओं को स्पष्ट बताना होगा कि E20 पर उनकी क्या राय है
- कार निर्माता एथेनॉल वाले पेट्रोल की अपनी तरफ से जांच कब कराएंगी और उसे सार्वजनिक कब करेंगी
- E20 पर सरकार, सियाम, कार निर्माता कंपनियां आखिर पारदर्शिता क्यों नहीं बरत रही हैं

