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ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने बंद नहीं किए हैं डिप्लोमैटिक चैनल: रिपोर्ट

ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने बंद नहीं किए हैं डिप्लोमैटिक चैनल: रिपोर्ट

'ईरान की पूरी सभ्यता रातो-रात ख़त्म करने' की डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक और अप्रत्यक्ष बातचीत के चैनल बंद नहीं किए हैं। तेहरान टाइम्स ने यह ताज़ा रिपोर्ट दी है।
पहले की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने सभी चैनल बंद कर दिए हैं।
हालाँकि, इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका और इसराइल के हमले का करारा जवाब देने की चेतावनी दी है। इसने चेताया कि अगर अमेरिका ने उसके पावर प्लांट या पानी की सुविधाओं पर हमला किया तो खाड़ी देशों के शहर बिजली और पानी के बिना रह जाएंगे और रहने लायक नहीं रहेंगे। ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रियायत के नहीं खोला जाएगा। उन्होंने 10 सूत्री प्लान पेश किया है जिसमें स्थायी शांति, प्रतिबंध हटाना और बुनियादी ढांचे की मरम्मत शामिल है। ईरान सिर्फ अस्थायी सीजफायर नहीं चाहता।ईरान का यह जवाब तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो 'एक पूरी सभ्यता रातो-रात ख़त्म हो जाएगी और कभी वापस नहीं आएगी'। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'आज रात एक पूरी सभ्यता ख़त्म हो जाएगी, कभी वापस नहीं लाई जा सकेगी। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद हो जाएगा।' उन्होंने कहा कि आज की रात 'दुनिया के लंबे और जटिल इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण रात' हो सकती है।


ट्रंप ने कब तक दी है डेडलाइन?
ट्रंप ने ईरान को वाशिंगटन के समय के अनुसार मंगलवार शाम आठ बजे तक का समय दिया है। यानी भारत के समय के अनुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे तक। उनकी मांग थी कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दे, ताकि तेल और गैस के जहाज आसानी से गुजर सकें। अगर ईरान ने ऐसा नहीं किया तो अमेरिका ईरान के हर पुल, पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देगा।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों इतना अहम?

यह जलडमरूमध्य दुनिया के क़रीब 20 प्रतिशत तेल और तरल प्राकृतिक गैस का रास्ता है। फ़रवरी 28 को अमेरिका-इसराइल के हमलों के बाद ईरान ने इसे ज्यादातर विदेशी जहाजों के लिए बंद कर दिया। इससे वैश्विक शिपिंग रूट बाधित हो गए और तेल की क़ीमतें बढ़ गईं।

रेलवे, पुल, प्लांट पर हमले

ट्रंप की डेडलाइन के क़रीब पहुंचते ही अमेरिका के नेतृत्व में ईरान पर हमले तेज हो गए। रेलवे और सड़क के पुलों, एक एयरपोर्ट और पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमले हुए। ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को भी निशाना बनाया गया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला होगा। ईरान की सेना ने चेतावनी दी कि ऐपल, गूगल, मेटा जैसी अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों और इसराइल से जुड़ी एनर्जी, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है।
पाकिस्तान और कतर जैसे देश अभी भी दोनों पक्षों के बीच मैसेज पहुंचाने का काम कर रहे हैं, लेकिन ईरान अब बातचीत बंद करने पर अड़ा हुआ है।

ईरानी सेना का बयान

ईरान की खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागारी ने कहा कि अमेरिका अगर ईरान की बिजली व्यवस्था पर हमला करता है तो भारी जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी कंपनियों को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

दुनिया पर क्या असर?

यह युद्ध शुरू हुए छह हफ्ते हो चुके हैं। होर्मुज बंद होने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। अगर युद्ध और बढ़ा तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। ट्रंप का कहना है कि वे नहीं चाहते कि सभ्यता नष्ट हो, लेकिन ईरान को समझौता करना होगा। वहीं ईरान कह रहा है कि अमेरिका की धमकियां हताशा दिखाती हैं।

डेडलाइन खत्म होने में कुछ घंटे बाकी हैं। दोनों तरफ से तनाव चरम पर है। अमेरिका हमले तेज कर रहा है और ईरान सख्ती से जवाब देने की तैयारी में है। पूरी दुनिया इस बात पर नजर टिकाए हुए है कि आज की रात क्या होता है। शांति का कोई रास्ता निकलता है या फिर और बड़ा संघर्ष शुरू हो जाता है।
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