भारतीय लोगों की विदेशी निगरानी के ख़तरे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार चीन के सीसीटीवी कैमरों और दूसरे विदेशी उपकरणों के ज़रिए हो रही निगरानी की सच्चाई छुपा रही है।
राहुल ने पूछा था
- हमारे कैमरे किन देशों से आए हैं?
- उनमें से कितने सुरक्षा प्रमाणित हैं?
- कौन से विदेशी AI प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा प्रोसेस कर रहे हैं?
- कौन से बैन किए गए ऐप्स नए नामों से चल रहे हैं?
पुरानी समस्या पर सवाल
राहुल गांधी ने याद दिलाया कि पांच साल पहले सरकार ने खुद माना था कि सरकारी विभागों में लगे 10 लाख चीनी कैमरों से डेटा विदेश भेजे जाने का ख़तरा है। लेकिन आज भी सरकार यह नहीं बता रही कि जो कैमरे आज हम पर नज़र रख रहे हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। उन्होंने कहा, 'अपनी नाकामियों को छुपाने और विदेशी निगरानी की सच्चाई छिपाने की कोशिश करके मोदी सरकार हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।'सरकार का जवाब क्या था?
25 मार्च को राहुल गांधी ने लोकसभा में अनस्टार्ड प्रश्न पूछा था। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जवाब दिया कि सरकार डिजिटल टेक्नोलॉजी से होने वाले साइबर सुरक्षा जोखिमों के प्रति जागरूक है। मंत्री ने बताया कि पिछले 12 सालों में सरकार ने डिजिटल इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं-- टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा
- नेटवर्क सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन के लिए कानूनी ढांचा मजबूत करना
- सीसीटीवी सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाना
राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने बहुत सारी बातें लिखीं, लेकिन उनके सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने पूछा कि आखिर आज भी सरकारी इमारतों में चीनी कैमरे क्यों लगे हैं? विदेशी AI प्लेटफॉर्म्स संवेदनशील डेटा क्यों प्रोसेस कर रहे हैं? और बैन ऐप्स नए नामों से क्यों चल रहे हैं?राहुल ने कहा कि सरकार की चुप्पी और ढकने की कोशिश से साफ़ है कि वह अपनी असफलताओं को छुपाना चाहती है, लेकिन इससे आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
यह मुद्दा काफी गंभीर है क्योंकि सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल ऐप्स और एआई प्लेटफॉर्म्स आज हर जगह आम लोगों की जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। अगर इनमें विदेशी निगरानी का खतरा है तो यह पूरे देश की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

