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1857 की क्रांति की अनसुनी वीरांगना: बेगम हज़रत महल

1857 की क्रांति की अनसुनी वीरांगना: बेगम हज़रत महल

Shagun News 2 days ago

कहाँ हुआ जन्म और बीता बचपन :

बेगम हज़रत महल का जन्म 1820 में फैजाबाद (अवध) में हुआ था। उनका बचपन का नाम मोहम्मदी ख़ानम था। वे अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह की पत्नी थीं। सुंदरता, बुद्धिमत्ता और दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए जानी जाती थीं।

अंग्रेजी ने की साजिश और पैदा किया संकट

1856 में अंग्रेजों ने अवध का विलय कर लिया और नवाब वाजिद अली शाह को कलकत्ता निर्वासित कर दिया। ज्यादातर लोग हार मान चुके थे, लेकिन बेगम हज़रत महल ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस क़ादर को अवध का नवाब घोषित किया और खुद शासन की बागडोर संभाल ली।

1857 की क्रांति में साहसी भूमिका

क्रांति की ज्वाला भड़कते ही बेगम हज़रत महल ने अंग्रेजों के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया। उन्होंने:

वे न सिर्फ रणनीतिकार थीं, बल्कि स्वयं युद्ध के मैदान में भी सक्रिय रहीं।

अंतिम संघर्ष और निर्वासन :

अंग्रेजों की भारी तोपखाने और सेना के आगे अंततः क्रांतिकारियों को पीछे हटना पड़ा। लेकिन बेगम हज़रत महल ने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। उन्होंने नेपाल शरण ली और वहीं से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा।1879 में काठमांडू में उनका निधन हुआ।

विरासत :

बेगम हज़रत महल का जीवन साहस, त्याग और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने साबित कर दिया कि स्वतंत्रता की लड़ाई में न सिर्फ राजपूत और मराठा वीर थे, बल्कि मुस्लिम महिलाएं भी बखूबी अपना योगदान दे रही थीं।

"वे न सिर्फ अवध की रानी थीं, बल्कि हिंदुस्तान की आजादी की मशाल थीं।" - प्रस्तुति : नीतू सिंह

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Shagun News