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दर्शकों को भावनाओं में डुबो गया साहिर-अमृता का अनकहा प्रेम

दर्शकों को भावनाओं में डुबो गया साहिर-अमृता का अनकहा प्रेम

Shagun News 2 weeks ago

खनऊ। मोहब्बत की वो दास्तां, जिसमें हार भी जीत लगे और जीत भी अधूरी रह जाए। 20वीं सदी की सबसे चर्चित साहित्यिक प्रेम कथा को जीवंत कर दिया एमबी क्लब छावनी में मंचित नाटक 'वो अफसाना' ने।

हुनर क्रिएशन एंड क्राफ्ट एसोसिएशन व दिल्ली की राबता संस्था के कलाकारों ने शमीर के निर्देशन में साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम के जुनून, निःस्वार्थ प्रेम और अधूरे रिश्ते को इतनी संवेदनशीलता से पेश किया कि दर्शक कई बार भावुक हो उठे।

नाटक साहिर के प्रसिद्ध शब्दों पर खुलता है - "वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा…" और ठीक यही करता है। अमृता की पंजाबी कविताओं के साथ साहिर के अमर गीत जैसे 'अभी न जाओ छोड़कर', 'कभी कभी मेरे दिल में', 'जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो…' और 'मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया…' नाटक में जान फूंक देते हैं।

मुख्य भूमिकाओं में निर्देशक शमीर ने साहिर लुधियानवी और डॉ. जयश्री सेठी ने अमृता प्रीतम का किरदार निभाया। गायन में श्रिया अरोड़ा और जावेद ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा।

समारोह में मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेन और चीफ ऑफ स्टाफ (मध्य कमान) सीजे जयचंद्रन ने कलाकारों को सम्मानित किया।

सुदेश सेठी और जयश्री द्वारा संकलित व रूपांतरित यह नाटक न सिर्फ एक प्रेम कहानी है, बल्कि साहित्य, संवेदना और जीवन की अनकही टीस का अनोखा मेल है।

दर्शक जब थिएटर से बाहर निकले तो चेहरे पर मुस्कान के साथ आंखों में नमी साफ झलक रही थी। कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं, वे बस खूबसूरत मोड़ लेकर यादों में बस जाती हैं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Shagun News