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कश्मीर में बदलती परिस्थितियां

पाक को माकूल जवाब मिलने के बाद इस बात में कोई दो राय नहीं कि जम्मू-कश्मीर में किए गए विभिन्न उपायों के फलस्वरूप स्थिति में काफी कुछ सुधार हुआ है। यह सुधार कई नजरियों से देखा जा सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि राज्य के लोग भी भारत के साथ मिल-जुलकर रहना चाहते हैं। आतंकवादी हिंसा के लगातार चलते रहने से उनका भी मन ऊब गया था और वे इसकी व्यर्थता को समझ भी रहे हैं।

विडंबना यह है कि इसके बावजूद आतंकवादी तत्व स्थिति को बिगाड़ने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने पर अभी भी आमादा हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाने पर लिया जा रहा है। इस दौरान इनकी हत्या की वारदातों में वृद्धि चिंता का विषय है। आतंकी संगठन इस साल के आरंभ से ही राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या करने की धमकी देते रहे हैं और मौका पाकर ऐसे हमलों को अंजाम भी दिया है। स्वाभाविक रूप से यह काम आतंकियों के सीमापार पाकिस्तान में बैठे आकाओं के हुक्म पर हुई हैं।

दरअसल पाकिस्तान कश्मीर में हुए बदलावों से चिढ़ा है और इसलिए किसी भी तरह से राजनीतिक गतिविधियों और प्रयासों को सफल नहीं होने देना चाहता। इसलिए वह अब इस तरह की साजिशें रचने में लगा है। अभी कुछ दिन पहले पुलवामा हमले को लेकर वहां की संसद में एक मंत्री ने कुबूल भी किया था कि यह पाकिस्तान का ही काम था और इसके लिए उस मंत्री ने गर्व भी जताया था। लेकिन कश्मीर में स्थितियां बदल चुकी हैं। पिछले सवा साल में राज्य में जिस तरह का सकारात्मक बदलाव आया है, उससे स्थानीय आतंकी संगठन बेचैन हैं और वे इसी हताशा में सुरक्षा बलों व राजनीतिक लोगों को निशाना बना रहे हैं।

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