उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी स्थापना दिवस समारोह: लोकगीतों की गूंज और कथक के बीच पुरस्कृत हुए विजेता
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी स्थापना दिवस पर पारम्परिक गीतों का उछाह हिलोरें लेता दिखाई दिया। यहां छठ पर्व के क़रीब- छठी माई के घरवा पे. व उगहे सुरुज देव भइले भिनसरवा.. जैसे छठ गीतों के संग माड़व तो भल सुंदर.. व अम्मा सावन मां जिया अकुलाए.. जैसे त्योहार और संस्कार गीतों की गूंज उठी। अकादमी स्थापना दिवस पर संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह गोमतीनगर में देवीगीत, संस्कार व त्योहार गीतों पर गत माह हुई प्रतियोगिताओं के विजेताओं के सुर गूंजे तो उन्हें पुरस्कृत भी किया गया। इस अवसर पर अकादमी कथक केन्द्र की विभिन्न रागों व रागों से सजी दशावतार प्रस्तुति का अलग ही आकर्षण मंच पर रहा।
इस अवसर पर प्रदेश की सम्पन्न लोकविधाओं की चर्चा करतें हुए मुख्य अतिथि के तौर पर अकादमी के उपाध्यक्ष डा.धन्नूलाल गौतम ने प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों और विजेताओं को बधाई दी और कहा कि अपनी संस्कृति और संस्कारों को सहेजना हमारा दायित्व है। अकादमी इस दिशा में प्रयत्नशील है।
इससे पहले सन् 1963 में स्थापित अकादमी की कोरोना काल के शिविरों, रिकार्डिंग व सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी देने के साथ अकादमी के सचिव तरुण राज ने अतिथियों का स्वागत किया। सचिव ने बताया कि अकादमी लोकनाट्य, लोक परम्पराओं, लोक धरोहरों और लुप्त होते लोकगीतों की अथाह सम्पदा को संजोने के प्रति प्रयत्नशील है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित मिशन शक्ति के तहत राज्य स्तर पर देवी गीत गायन प्रतियोगिता हुई तो संस्कृति मंत्री की पहल पर संस्कार व त्योहार गीतों पर स्पर्धा आयोजित की गई। विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने बताया कि संस्कार गीतों व त्योहार गीतों के संकलन को अकादमी प्रकाशित भी करेगी।

