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फ़िक्र का बाग़ी

फ़िक्र का बाग़ी

Shagun News 1 week ago

राहुल गुप्ता

या एक लफ़्ज़ आया है हुकूमत के शाही-इलाक़ों से।
डराया जा रहा है फिर हमें शाहों की बातों से।।

वो कहते हैं कि ज़ेहनों में कोई आसेब रहता है।
जो हर बातिल सियासत के मुक़ाबिल जा के अड़ता है।।

बताओ तो सही आख़िर कहाँ वो शख़्स रहता है?
वो क्या खाता, पहनता है, वो कैसी साँस लेता है??

क्या उसकी जेब ख़ाली है, या वो बे-रोज़गारों में?
या उसका नाम शामिल है किसी बिकते विचारों में??

क्या उसने ही गिराए हैं तमाशा बनते ये पुले-न नक़्श?
कराया पेपर-लीक उसने, या उसने छीने हैं सब हक़??

क्या उसने ही घटाई है मकाँ की रोटियों के रंग।
बढ़ाई है महँगाई, या वो लाता है दिलों में जंग??

क्या नदियों के ज़हर में उसने अपना घर बनाया है?
या जंगलों को काटकर वो ही ज़मीं को बेच आया है??

कि जिसने सोच को अपनी गुलामी से रिहा रखा।
हुकूमत ने उसी का नाम 'फ़िक्र का बाग़ी' रखा!!

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Shagun News