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कंगना रनौत ने परिवार और करियर के बीच संतुलन की चुनौती पर की खुलकर बात

कंगना रनौत ने परिवार और करियर के बीच संतुलन की चुनौती पर की खुलकर बात

Stress Buster 4 months ago

महिलाओं की कार्यस्थल पर भागीदारी और चुनौतियाँ

मुंबई, 1 जून। वर्तमान समय में महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाना अब भी एक बड़ी चुनौती है।

खासकर मातृत्व के बाद, कई महिलाओं के लिए नौकरी और बच्चों की जिम्मेदारियों को संभालना आसान नहीं होता। इस मुद्दे पर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने अपनी नई फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के प्रमोशन के दौरान अपने विचार साझा किए।

कंगना ने कहा कि यदि समाज और सरकार चाहती हैं कि महिलाएं कार्यस्थल पर सक्रिय रहें, तो उन्हें बेहतर सुविधाएं और सहयोग प्रदान करना चाहिए।

उन्होंने शूटिंग के अनुभवों को साझा करते हुए कहा, ''मेरी सह-कलाकार स्मिता तांबे की बेटियां अक्सर सेट पर आती थीं, और अभिनेता अक्षत का बच्चा भी कई बार वहां मौजूद रहता था। बच्चे सेट पर एक-दूसरे के साथ खेलते थे, जबकि कलाकार अपने काम में व्यस्त रहते थे। इस सबको देखकर मुझे यह सवाल बार-बार उठता था कि कार्यस्थल को इस तरह क्यों नहीं बनाया जाता? कामकाजी माताओं के लिए बच्चों के कमरे क्यों नहीं होते?''

कंगना ने आगे कहा, ''आजकल कार्यस्थल पर कर्मचारियों के लिए कई सुविधाओं की बात होती है, जैसे प्रार्थना कक्ष और अन्य आवश्यकताओं के लिए इंतजाम, लेकिन बच्चों के लिए देखभाल की व्यवस्था बहुत कम होती है। जब महिलाओं को काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, तो यह आवश्यक है कि उनके बच्चों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। यह केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक अनिवार्य व्यवस्था होनी चाहिए।''

उन्होंने यह भी कहा, ''महिलाओं को कार्यस्थल पर लाने और उन्हें लंबे समय तक काम से जुड़े रहने के लिए केवल नीतियों का बनाना ही काफी नहीं है। इसके साथ ऐसी सुविधाएं भी जरूरी हैं जो उनके जीवन को सरल बना सकें। एक मां अपने बच्चे की चिंता से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकती। यदि कार्यस्थल पर बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान हो, तो महिलाएं अधिक आत्मविश्वास और सुकून के साथ काम कर सकेंगी।''

कंगना ने इस विषय को सरकार की सोच और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, ''देश में महिलाओं को आगे बढ़ाने और हर क्षेत्र में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन इसके साथ आने वाली चुनौतियों को भी समझना होगा। जब बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यस्थल में आएंगी, तब बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।''

कंगना ने कहा, ''आज कई महिलाओं को ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है, जहां उन्हें परिवार और करियर में से किसी एक को प्राथमिकता देनी पड़ती है। कई बार उचित सहयोग न मिलने के कारण महिलाएं अपने पेशेवर सपनों से समझौता कर लेती हैं। यदि समाज सच में महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ते देखना चाहता है, तो उन्हें मजबूत सहायता प्रणाली प्रदान करनी होगी। केवल महिलाओं से उम्मीद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए अनुकूल माहौल तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है।''

कंगना का मानना है कि भविष्य में यह मुद्दा और भी बड़ा होगा। जैसे-जैसे अधिक महिलाएं नेतृत्व की भूमिकाओं में आएंगी और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाएंगी, बच्चों की देखभाल से जुड़ी सुविधाओं की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि भविष्य में महिलाओं को करियर और परिवार के बीच कठिन चुनाव न करना पड़े।


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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Stress Buster