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क्या है कूवगम उत्सव? विकास खन्ना की यात्रा से जानें भारत की सांस्कृतिक विविधता

क्या है कूवगम उत्सव? विकास खन्ना की यात्रा से जानें भारत की सांस्कृतिक विविधता

Stress Buster 1 month ago

भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव

मुंबई, 28 मार्च। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ थोड़ी दूरी तय करने पर जीवनशैली, भोजन और परिधान में बदलाव देखने को मिलता है। यह विविधता हमारे त्योहारों के माध्यम से खूबसूरती से प्रकट होती है, जो न केवल उत्साह बढ़ाते हैं बल्कि भाईचारे और एकता का संदेश भी देते हैं।

होली और ईद के बाद, अब अप्रैल में कई महत्वपूर्ण त्योहारों का आगमन हो रहा है। प्रसिद्ध शेफ विकास खन्ना ने इस विविधता पर खुशी व्यक्त करते हुए इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने बताया कि वह अप्रैल में एक विशेष यात्रा पर निकलने वाले हैं, जिसमें उन्होंने लिखा, "8 दिन, 5 अलग-अलग क्षेत्र और एक ही भावना।"

विकास ने अपने संदेश में बताया कि उनकी यात्रा की शुरुआत पवित्र कूवगम उत्सव (19 अप्रैल से 6 मई तक) से होगी। उन्होंने कहा, "यह उत्सव तीन दिनों तक चलेगा और यह ट्रांसजेंडर समुदाय का प्रमुख त्योहार है, जो पहचान, भक्ति और हर व्यक्ति की गरिमा का प्रतीक है।" यह उत्सव महाभारत की कूथंडावर (अरावन) की कहानी से जुड़ा हुआ है, जहाँ हजारों ट्रांसजेंडर महिलाएं भगवान अरावन से विवाह करती हैं और अगले दिन विधवा बनकर शोक मनाती हैं।

विकास ने आगे बताया कि इसके बाद वे फसल के त्योहारों की ओर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा, "अप्रैल में भारत के विभिन्न हिस्सों में नया साल, नई फसल और नई शुरुआत का जश्न मनाया जाता है।" उत्तर भारत में बैसाखी का त्योहार मनाया जाता है, जो पंजाब और हरियाणा में फसल कटाई का प्रतीक है। दक्षिण में विषु का पर्व मनाया जाता है, जो केरल में नई फसल और समानता का प्रतीक है। पूर्व में पोहेला बोइशाख (बंगाल का नया साल) और रोंगाली बिहू (असम का रंगीन त्योहार) की रौनक देखने को मिलती है।

उन्होंने अंत में लिखा, "भारत केवल त्योहारों का देश नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सभ्यता है जो हर रूप और हर जीवन का सम्मान करती है। फसल से मानवता तक…यही हमारी छोटी सी प्रस्तुति है।"

कूवगम उत्सव तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में कुथंडावर मंदिर में आयोजित होने वाला एक अनोखा 15-18 दिवसीय उत्सव है। महाभारत के अनुसार, अरावन (अर्जुन और नाग राजकुमारी उलूपी के पुत्र) ने पांडवों की जीत के लिए बलिदान देने से पहले एक रात की शादी करने की इच्छा जताई थी। भगवान कृष्ण ने 'मोहिनी' रूप में उनसे विवाह किया।

ट्रांसजेंडर समुदाय खुद को 'मोहिनी' मानकर अरावन से विवाह करते हैं और अगले दिन अपनी चूड़ियां तोड़कर सफेद साड़ी पहनकर विधवा का रूप धारण करते हैं।


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