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अजब गज़ब
इस गांव में हर कोई है बौना! ये है दुनिया का असली लिलिपुट गांव

इस रंग-रंगीली दुनिया में हर जगह, हर देश, हर इंसान रंगीला है और जिस तरह रंगो के कई प्रकार होते है उसी तरह कई परम्पराएं और अजीबो-गरीब चीजों से भरी पड़ती है। दुनिया में कई तरह के रहस्य है। वैसे आपने गुलिवर और लिलिपुट वासियों की कहानी तो सुनी ही होगी ना, जहां के सभी लोग छोटे-छोटे रहते है, खैर ये तो सिर्फ एक कहानी है लेकिन उसी तरह इस दुनिया में एक ऐसा गांव भी है जहां के सभी लोग बौने है !! जी हां, इस गांव के हर इंसान की सिर्फ 2 से 3 फीट की ही लम्बाई है। आइए, आपको बताते है इस अनोखे और अजीबो-गरीब गांव के बारें में

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पूरी दुनिया में सिर्फ नाम मात्र के ही बौने लोग बचे है। वैसे इस गांव के बारें में जानकर आप भी सोच रहें होंगे कि भला वहां के लोग कैसे अपना जीवन व्यतीत करते है ? इस गांव के लगभग सभी लोगो की अधिकतम लंबाई मात्र 2 फीट 1 इंच से लेकर 3 फीट 10 इंच तक ही है। इतनी अधिक संख्या में लोगों के बौने होने के कारण यह गाँव ड्वार्फ विलेज के नाम से जाना जाता है।

जैसा कि आपको पता है कि चीन दुनिया में सबसे ज्यादा कारणों से जाना जाता है उसी तरह ये बौने लोग भी चीन में ही रहते है। यह गांव चीन के शिचुआन प्रांत के दूर-दराज़ पहाड़ी इलाके में स्थित है। गाँव का नाम यांग्सी है और यह गाँव ड्वार्फ विलेज ऑफ़ चाइना के नाम से फेमस है। इस गांव के लगभग 95 प्रतिशत लोगो की लंबाई मात्र 3 फीट ही है।

वैसे इन बौने लोगो के बारें में बताया जाता है कि यहां के बच्चो की लम्बाई 5 से 7 वर्ष के बाद रुक जाती है। और उसके बाद उनकी उम्र तो बढ़ती है लेकिन लंबाई पर कोई असर नही पडता है। लेकिन कुछ मामलों में बच्चों की लम्बाई सिर्फ 10 वर्ष तक ही बड़ पाई है। लेकिन इसके बाद उनकी भी लम्बाई नहीं बड़ी और वो बौनें ही रह गये।


वैसे तो यह गांव ज्यादा पुराना नही है लेकिन यहां पर इस तरह का मामला 1951 में देखने को मिला। गाँव के बुजुर्गो की मानें तो उनकी खुशहाल और सुक़ून भरी ज़िन्दगी कई दशकों पूर्व ही ख़त्म हो चुकी है। जब इस इलाके को एक खतरनाक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था। और उसके बाद से ही सभी में यह आनुवंशिक रूप से देखने को मिला और फिर बौने ही बच्चे पैदा होने लगे।

हालांकि इन पर किए गए शोध में भी पता चला है कि यहां लंबाई का रूकना कोई आनुवंशिकी कारण नही है। यहां के लोग कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूंझ रहे हैं। इस इलाके में बौनों को देखे जाने की खबरें तो 1911 से आ रही हैं। लेकिन उसकी अधिकारिक पुष्टि 1951 में ही हुई थी।


वैसे आज भी वैज्ञानिकों के लिए यह एक परेशानी का कारण बना हुआ है कि एक सामान्य कद काठी वाला गाँव एकदम से अचानक बौनों के गाँव में तब्दील हो गया। इस बात का अध्ययन करने और कारणों का पता करने के लिए यहां की मिटटी, पानी, हवा, वातावरण, अनाज सभी पर शोध किया लेकिन आजतक इस बीमारी का पता नही चल पाया।


हालांकि चीन और यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां 1997 में किए गए एक रिसर्च के दौरान पाया गया था कि यहां कि जमीन में पारा पाया गया था जिसके कारण यहां के पानी में मिलकर ये लोगो के खून में समा चुका है उसी वजह से यहां की मिट्टी और पानी में ऐसा हो गया और लोगों की लम्बाई पर विश्राम लग गया। वैसे इस बात को साबित नहीं किया जा सका और ये रहस्य आज तक बरकरार है।


इसके अलावा भी यहां के लोगो और चीन का मानना है कि सब जापानियों का किया हुआ है। जापान ने कई दशकों पहले चीन में जहरीली गैसे छोड़ी थी। जिसका असर आज यहां के लोगो में देखने को मिल रहा है। हालाँकि एक तथ्य यह भी है कि जापान चीन के इस इलाके में कभी पहुँच ही नहीं पाया था।


जितनी बात उतनी ही अफवाएं, और इसी कारण यहां के लोग इस बीमारी से ग्रसित है। तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ख़राब फेंगशुई के चलते ऐसा हो रहा है। इसके अलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सब अपने पूर्वजों को सही तरीके से दफ़न नहीं करने की वजह से भी यह सब भुगत रहे हैं।

Dailyhunt
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