असम की पारंपरिक और विश्व प्रसिद्ध मोगा सिल्क उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 'मिशन स्नेहजोरी' नामक महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत लगभग 411 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
इस योजना से राज्य के करीब 2.5 लाख बुनकरों, रेशम उत्पादकों और उद्यमियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह परियोजना वर्ष 2026 से 2028 तक लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य मोगा सिल्क के उत्पादन, गुणवत्ता और विपणन को बेहतर बनाना है, ताकि असम का यह पारंपरिक उत्पाद वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बना सके।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा, पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के बुनकरों और उद्योग से जुड़े लोगों को भी वर्चुअल माध्यम से जोड़ा गया।
योजना की घोषणा करते हुए सिंधिया ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मोगा सिल्क को स्थानीय उत्पादन केंद्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है। इसके लिए उत्पादन श्रृंखला को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की अलग-अलग विशेषताओं को ध्यान में रखकर विकास योजनाएं बनाई जा रही हैं। जहां कुछ राज्यों को कॉफी, जैविक खेती, कीवी और अदरक जैसे उत्पादों के लिए पहचान मिली है, वहीं असम को उसकी अनूठी मोगा सिल्क विरासत के लिए विशेष महत्व दिया गया है।
मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा विभिन्न मंत्रालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग प्रतिनिधियों को जोड़ा गया है। इस सहयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार विस्तार की दिशा में काम किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत जोरहाट, शिवसागर, सुआलकुची, माजुली और लखीमपुर में आधुनिक रीलिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा धेमाजी में विशेष मोगा स्पन सिल्क यूनिट विकसित की जाएगी, जिससे प्रसंस्करण और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह मिशन केवल उत्पाद को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन किसानों और बुनकरों को भी सशक्त करेगा जो इस उद्योग की रीढ़ हैं। इसके तहत 1,180 किसान हित समूह (FIG) और 30 किसान उत्पादक संगठन (FPO) गठित किए जाएंगे।
योजना में डिजिटल ट्रेसबिलिटी और जीआई प्रमाणीकरण व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। इससे विदेशी खरीदार आसानी से यह सत्यापित कर सकेंगे कि उत्पाद वास्तव में असम की प्रमाणित मोगा सिल्क से बना है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मोगा सिल्क पहले से ही जीआई टैग के माध्यम से विशिष्ट पहचान प्राप्त कर चुकी है। मिशन स्नेहजोरी के जरिए उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही यह पहल असम की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में मददगार साबित होगी।
कार्यक्रम के दौरान बुनकरों, उद्यमियों, निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद भी किया गया। इसके अलावा मोगा सिल्क की ऐतिहासिक विरासत और महत्व को दर्शाने वाली एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिशन स्नेहजोरी मोगा सिल्क उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से असम दुनिया में स्वर्णिम रेशम (Golden Silk) के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।

