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बंगाल के भाटपाड़ा में चारों तरफ गंदगी का अंबार; जनता सवाल उठा रही... लेकिन कोई सुनने वाला नहीं, देखें सुदर्शन न्यूज़ की चुनावी स्पेशल रिपोर्ट

बंगाल के भाटपाड़ा में चारों तरफ गंदगी का अंबार; जनता सवाल उठा रही... लेकिन कोई सुनने वाला नहीं, देखें सुदर्शन न्यूज़ की चुनावी स्पेशल रिपोर्ट

श्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, जल्द ही राज्य की 294 सीटों पर मतदान होने वाला है, लेकिन वोट से पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता की वास्तविक समस्याओं को सुना जा रहा है।

सुदर्शन न्यूज़ की ब्यूरो चीफ संगीता झा ने इस सवाल का जवाब जानने के लिए ग्राउंड जीरो पर जाकर जनता की असली आवाज़ उठाई।यहां देखें हमरा शों जनमंच...

सुदर्शन न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, एंग्लो इंडिया हाई स्कूल के पीछे लगे कचरे के ढेर ने न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला है। स्कूल में आने वाले बच्चे किताबों से ज्यादा गंदगी और बदबू से जूझ रहे हैं। स्कूल के ठीक पीछे का इलाका कचरे से भरा हुआ है, जिसकी वजह से बच्चों को पढ़ाई करने में मुश्किल होती है और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। कई बार तो स्कूल को समय से पहले बंद करना पड़ता है।

जिम्मेदार कौन?

स्थानीय लोग बताते हैं कि प्रशासन बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "बहुत बार कंप्लेंट हुआ है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बच्चों को बीमारी हो रही है, और बोलने से डर है क्योंकि मार खाने का खतरा है। पिछले 15 सालों में कोई समाधान नहीं हुआ।"

बच्चों से जब पूछा गया कि उन्हें किस चीज़ से परेशानी हो रही है, तो उन्होंने कहा, "कचरे और बदबू से सांस लेने में दिक्कत होती है। बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। खेलने और पढ़ाई में मुश्किल होती है।" स्थानीय लोग सरकार और प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि कचरा फेंकना तुरंत बंद कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह समस्या रोज़मर्रा की है और बच्चों के भविष्य को भी प्रभावित कर रही है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, कचरा हर दिन आता है और जलाया जाता है, जिससे पूरी बस्ती में बदबू फैलती है। स्कूल प्रबंधन और जनता लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं।

संगिता झा ने बताया कि यह मामला न केवल बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि यह सिस्टम की लापरवाही को भी उजागर करता है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन और अधिकारियों का ध्यान इस पर जाएगा और समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा। सुदर्शन न्यूज़ ने न केवल जनता की आवाज़ को सामने लाया, बल्कि नेताओं से भी जवाब लेने की कोशिश की। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान निकलेगा या फिर यह सब सिर्फ चुनावी वादों तक ही सीमित रह जाएगा।

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