उतरौला(बलरामपुर)।ऑनलाइन नामांतरण यानी दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। उतरौला तहसील परिसर में अधिवक्ताओं का क्रमिक अनशन बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।
इस दौरान 40 अधिवक्ता अनशन पर बैठकर नई प्रक्रिया के प्रति अपना विरोध जताया। आंदोलन के समर्थन में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर से बाइक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था समाप्त कर पूर्व की प्रक्रिया बहाल करने की मांग उठाई।
अधिवक्ताओं के आंदोलन का असर न्यायिक कार्यों के साथ ही रजिस्ट्री कार्यालय के कामकाज पर भी पड़ रहा है। विरोध के चलते दीवानी और तहसील न्यायालयों में सूचीबद्ध 685 वादों की सुनवाई नहीं हो सकी। वहीं, रजिस्ट्री कार्यालय में लगातार 17वें दिन भी किसी दस्तावेज का पंजीकरण नहीं हुआ। इसके कारण जमीन और संपत्ति की खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्री नहीं होने से संबंधित कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है।
बुधवार को क्रमिक अनशन स्थल तहसील परिसर से अधिवक्ताओं ने बाइक रैली निकाली। रैली मुख्य बाजार के विभिन्न मार्गों से होते हुए वापस तहसील परिसर पहुंचकर समाप्त हुई। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था वापस लेने की मांग की। रैली के माध्यम से उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ताओं की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
आंदोलनकारी अधिवक्ताओं का कहना है कि नामांतरण की प्रक्रिया को लेकर उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान किया जाना जरूरी है। उनका विरोध मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर है और वे चाहते हैं कि पहले की प्रक्रिया को फिर से लागू किया जाए। इसी मांग को लेकर अधिवक्ता क्रमिक अनशन और विरोध प्रदर्शन के जरिए अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव और महामंत्री रवि शंकर मिश्र ने ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया को समाप्त कर पूर्व की व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उन्होंने प्रशासन से अपनी हठधर्मिता छोड़कर अधिवक्ताओं की समस्याओं पर विचार करने की अपील की। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करते समय उससे जुड़े लोगों की व्यावहारिक कठिनाइयों को भी समझना चाहिए।
पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि जनता पर जबरन कोई नियम नहीं थोपा जाना चाहिए। उनके अनुसार, व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे आम लोगों को सुविधा मिले और उनके राजस्व संबंधी कामकाज में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न न हों।
वहीं, पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र कुमार ने ऑनलाइन नामांतरण प्रक्रिया को काला कानून बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में संघर्ष जारी रखने की बात कही।
अधिवक्ताओं के विरोध के कारण न्यायालयों में वादों की सुनवाई प्रभावित होने से मुकदमों से जुड़े पक्षकारों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। बुधवार को दीवानी और तहसील न्यायालयों में कुल 685 वादों की सुनवाई नहीं हो सकी। इसके साथ ही रजिस्ट्री कार्यालय में लगातार 17वें दिन दस्तावेजों का पंजीकरण नहीं होने से संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
रजिस्ट्री का काम ठप रहने से उन लोगों को विशेष परेशानी हो रही है, जिन्हें जमीन या अन्य संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों का पंजीकरण कराना है। आंदोलन के लंबा खिंचने से न्यायिक और राजस्व संबंधी कार्यों के प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में अधिवक्ताओं की मांगों और आम जनता की परेशानियों के बीच समाधान निकालना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
क्रमिक अनशन के दूसरे दिन मोहम्मद खलील खान, देवेंद्र कुमार, राम चंद्र जायसवाल, सियाराम मिश्र, अलाउद्दीन खान, ओपी सिंह, भूषण लाल, गजनफर अली, आयशा फैज़ान, मिशम, अजीत यादव, प्रेमनाथ वर्मा, शुभम गुप्त, राम चंदर, आदित्य कुमार, मोहम्मद कैश और इरफान खान सहित अन्य अधिवक्ता अनशन पर बैठे।
इसके अलावा अनशन स्थल पर नसीम अहमद, अरविंद श्रीवास्तव, सतीश वर्मा, डीएन सिंह, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, अखिलेश तिवारी, आरके पांडेय, इज़हारुल हसन, अजय विमल, सीबी माथुर, मुस्तफा हैदर, अजीत मौर्य, आशीष कसौधन, राकी, शादाब खान, अखिल श्रीवास्तव, दीप चंद्र गुप्त, धर्मराज यादव, आलोक गुप्त, अमित श्रीवास्तव, मोहिब खान, दिनकर और श्वेता सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब क्रमिक अनशन और बाइक रैली के जरिए लगातार आगे बढ़ रहा है। अधिवक्ता अपनी मांग पर अड़े हैं, जबकि न्यायालयों में सुनवाई प्रभावित होने और रजिस्ट्री कार्यालय में कामकाज ठप रहने से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। अब देखना होगा कि अधिवक्ताओं की मांगों पर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और यह गतिरोध कब समाप्त होता है।

