1008 स्थानों पर सामूहिक पाठ का संकल्प
कोलकाता। युवा पीढ़ी, विशेष तौर पर जेनरेशन जेड यानी 'जेन जीÓ को सनातन संस्कृति और प्राचीन परंपराओं से मजबूती से जोडऩे के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल में एक बहुत बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
इसी कड़ी में राज्य के कुल 1008 अलग-अलग स्थानों पर जेन जी की सक्रिय भागीदारी के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ आयोजित करने का भव्य संकल्प लिया गया है। इस अनूठे आयोजन का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक जड़ों, संस्कारों और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से भली-भांति परिचित कराना है।
इसी सिलसिले में मंगलवार शाम पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से पूज्य आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज ने एक विशेष मुलाकात की। दोनों के बीच इस आगामी 1008 कुंडीय यज्ञ और प्रस्तावित विशाल सनातन महाआयोजन को लेकर बेहद विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक के दौरान आयोजन की रूपरेखा, उसके मूल उद्देश्यों और नई पीढ़ी को इस आध्यात्मिक अभियान से जोडऩे के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
मुलाकात के बाद आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज ने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बंगाल की ऐतिहासिक धरती पर इतने वृहद पैमाने पर किसी सनातन धार्मिक आयोजन का होना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभूतपूर्व आयोजन उन धर्मनिष्ठ लोगों की वजह से संभव हो पा रहा है, जो सनातन धर्म और संस्कृति के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं तथा जिन्होंने राज्य की बागडोर सनातन परंपरा के प्रति समर्पित नेतृत्व को सौंपी है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आचार्य श्री को अवगत कराया कि जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज का बंगाल की पवित्र भूमि पर आगमन और इस विशाल महाआयोजन को संपन्न कराना समूचे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण एवं गौरव का विषय है। उनके पावन सान्निध्य को बंगाल के सनातन समाज के लिए एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर करार दिया गया। आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज ने आगे कहा कि बंगाल की धरती सदियों से धर्म, भक्ति और उच्च कोटि की आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। श्री चैतन्य महाप्रभु, श्री रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जैसे महान आध्यात्मिक विभूतियों ने इसी पावन भूमि से भारतीय अध्यात्म और सनातन संस्कृति का सार्वभौमिक संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया था।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब उस गौरवशाली आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का समय आ गया है। इसके साथ ही उन परिवारों को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दोबारा जोडऩे की आवश्यकता है, जो किन्हीं कारणों से अपनी मूल सनातन परंपरा से थोड़े दूर हो गए हैं। इसी मुख्य उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रामानंद मिशन की ओर से पश्चिम बंगाल के 1008 अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ आयोजित करने का संकल्प लिया गया है। इस विशेष अभियान में छात्र-छात्राओं, युवाओं और खासतौर पर 'जेन जीÓ को बड़ी संख्या में जोडऩे की सुनियोजित योजना है। आयोजकों का दृढ़ विश्वास है कि ऐसी धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से ही नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध परंपरा और अमूल्य विरासत से जोड़ा जा सकता है।
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी को यह समझाने की अत्यधिक आवश्यकता है कि सनातन परंपरा में जन्म लेना केवल एक साधारण पहचान नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों से चली आ रही एक अत्यंत समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुडऩे का सौभाग्यपूर्ण अवसर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी प्राचीन परंपराओं, संस्कारों और संस्कृति को गहराई से समझें तथा उसे आगे बढ़ाएं। प्रस्तावित 1008 कुंडीय यज्ञ और सनातन महाआयोजन को लेकर अब राज्य में प्रशासनिक और सांगठनिक तैयारियां तेजी से आगे बढऩे की उम्मीद है। इसके साथ ही 1008 स्थानों पर होने वाले सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ को एक युवा केंद्रित अभियान का रूप देने की पुख्ता तैयारी चल रही है। इस धार्मिक आयोजन के जरिए आयोजकों का मुख्य लक्ष्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं से जोडऩा है।
बंगाल की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखकर प्रस्तावित यह बहुप्रतीक्षित आयोजन आने वाले दिनों में राज्य के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में शुमार हो सकता है। विशेष रूप से 'जेन जीÓ की इसमें सक्रिय भागीदारी इस पूरे धार्मिक-सांस्कृतिक अभियान को एक अलग और अनूठी पहचान देने का काम करेगी।

