सबिना याशमिन का वीडियो किया वायरल
कोलकाता। कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाए जाने की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने अब एक नया और भयंकर राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय द्वारा साझा किए गए एक वीडियो बम ने तृणमूल सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मालवीय का दावा है कि यह घटना कोई स्वत:स्फूर्त जन-आक्रोश नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के रसूखदार मंत्रियों और नेताओं के इशारे पर रची गई एक सुनियोजित साजिश थी। इस खुलासे के बाद बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि घटना वाले दिन कालियाचक के बीडीओ कार्यालय के आसपास तृणमूल के कुछ कद्दावर मंत्रियों की संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं। भाजपा का सीधा आरोप है कि सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के पीछे स्थानीय आक्रोश की आड़ में एक गहरी राजनीतिक बिसात बिछाई गई थी।
भाजपा के अनुसार, जिस तरह से भीड़ ने संगठित होकर अधिकारियों को घेरा, वह बिना किसी ऊंचे राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं था। पार्टी अब इस वीडियो को आधार बनाकर ममता सरकार के मंत्रियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रही है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा की डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट की कारस्तानी बताया है। सत्ताधारी दल का कहना है कि हार के डर से भाजपा अब पुराने और काट-छांट किए गए वीडियो के जरिए प्रदेश के मंत्रियों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है। तृणमूल नेतृत्व का तर्क है कि घटना के पीछे असल साजिशकर्ता भाजपा के ही लोग हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था को चुनौती देकर चुनाव प्रभावित करना चाहते हैं। पार्टी ने इसे भ्रामक और राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार देते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि कालियाचक की इस घटना ने न्यायपालिका को भी हिला कर रख दिया था, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया है। अब जब वीडियो के जरिए मंत्रियों और बड़े नेताओं की संलिप्तता के आरोप लग रहे हैं, तो एनआईए की जांच का दायरा बढऩा तय माना जा रहा है। यदि जांच में वीडियो की सत्यता और राजनीतिक हस्तक्षेप के प्रमाण मिलते हैं, तो चुनावी समर के बीच तृणमूल के कई सफेदपोशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल, कालियाचक की आग अब सियासी बयानों के जरिए पूरे बंगाल में फैल चुकी है।

