मिताली बाग की टूटी चप्पल, भारी हुजूम के बीच नंगे पैर ही पहुंचीं नामांकन कराने
कोलकाता। चुनावी रण में नेताओं के भाषण और रैलियां तो आम हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन जाती हैं।
घाटल में गुरुवार को कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब आरामबाग की सांसद मिताली बाग को समर्थकों के भारी हुजूम के बीच अपनी चप्पल गंवानी पड़ी। चप्पल टूटने और भीड़ में खो जाने के बावजूद, सांसद ने रुकने के बजाय नंगे पैर ही तप्त सड़क पर लंबा रास्ता तय कर अपनी सादगी और जुझारूपन का परिचय दिया। यह वाकया उस समय हुआ जब मिताली बाग चंद्रकोणा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सूर्यकांत डोलोई के समर्थन में आयोजित एक विशाल जुलूस का नेतृत्व कर रही थीं। घाटल महकमा शासक कार्यालय की ओर बढ़ते इस काफिले में समर्थकों का उत्साह चरम पर था। धक्का-मुक्की और भारी भीड़ के बीच अचानक किसी का पैर पडऩे से सांसद की चप्पल टूट गई।
सड़क पर समर्थकों का इतना दबाव था कि बीच रास्ते में रुककर चप्पल ठीक करना या उसे ढूंढना नामुमकिन था। सांसद मिताली बाग ने इस स्थिति को बाधा बनाने के बजाय एक अवसर की तरह लिया। उन्होंने बिना किसी तामझाम या झिझक के अपनी टूटी हुई दूसरी चप्पल भी उतार दी और नंगे पैर ही जुलूस के साथ आगे बढऩे लगीं। कड़ी धूप और पथरीली सड़क के बावजूद वे मुस्कुराते हुए समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करती रहीं। काफी देर तक वे एसडीओ कार्यालय परिसर में भी नंगे पैर ही घूमती नजर आईं, जिसे देखकर वहां मौजूद चुनाव अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी हैरान रह गए। बाद में जब सहयोगियों ने उनके लिए नई चप्पल की व्यवस्था की, तब जाकर उन्होंने राहत की सांस ली। इस चप्पल कांड पर चुटकी लेते हुए और अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मिताली बाग ने कहा कि जनता का सैलाब और उनका प्यार इतना गहरा था कि चप्पल टूटने की छोटी सी तकलीफ का अहसास ही नहीं हुआ। जब आप लोगों के हक की लड़ाई लडऩे निकलते हैं, तो ऐसी छोटी-मोटी असुविधाएं मायने नहीं रखतीं।

