ममता के इन बेहद आक्रामक और गंभीर आरोपों ने बंगाल की राजनीति में एक नया और भीषण उबाल ला दिया है
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में शह-मात का खेल अब चरम पर पहुंच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल की प्रमुख ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर भाजपा और राज्य प्रशासन के खिलाफ एक बहुत बड़ा मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में आरोप लगाया कि इस समय पूरे राज्य में दमनकारी बुलडोजर राज चलाया जा रहा है और तृणमूल कांग्रेस को सांगठनिक रूप से पूरी तरह कमजोर करने के लिए उसके विधायकों, सांसदों और जमीनी नेताओं पर चौतरफा मानसिक व प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने इस सियासी खेल की कडिय़ों को खोलते हुए एक बड़ा सनसनीखेज दावा किया।
उन्होंने कहा कि तृणमूल के विधायकों को पाला बदलने के लिए सीधे पुलिस के जरिए डराया-धमकाया जा रहा है। उनके मुताबिक, स्थानीय थानों के प्रभारी (आईसी) और जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर के बड़े अधिकारी खुद जनप्रतिनिधियों को फोन घुमा रहे हैं और उन्हें तृणमूल छोडऩे के लिए परोक्ष रूप से मजबूर कर रहे हैं। ममता ने कहा कि हमारे विधायकों और नेताओं को साफ-साफ अल्टीमेटम दिया जा रहा है कि वे टीएमसी का साथ छोड़ दें। खेल का तरीका यह है कि पहला फोन पुलिस की तरफ से आता है और ठीक उसके बाद दूसरा फोन भाजपा के किसी न किसी दफ्तर या बड़े नेता की ओर से आ जाता है। क्या देश में इसी तरह का लोकतंत्र बचा है?
तृणमूल प्रमुख ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि भाजपा ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया है। विपक्ष को रैलियां, जनसभाएं या किसी भी तरह के राजनीतिक कार्यक्रम करने की प्रशासनिक अनुमति तक नहीं दी जा रही है। कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद करने जैसे हालात पैदा कर दिए गए हैं और बाहर निकलने पर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्यभर में तृणमूल कांग्रेस के करीब ढाई हजार पार्टी दफ्तरों को तोड़कर नेस्तनाबूद कर दिया गया है, यहाँ तक कि कई जगहों पर राजनीतिक विद्वेष के कारण मंदिरों तक में ताले जड़ दिए गए हैं।
केंद्रीय जांच एजेंसियों के बेजा इस्तेमाल पर बोलते हुए ममता ने खुलासा किया कि पार्टी के कम से कम चार मौजूदा विधायकों ने खुद उन्हें रोते हुए बताया है कि यदि वे तृणमूल की किसी भी बैठक या रणनीति का हिस्सा बनते हैं, तो उन्हें आर्म्स एक्ट, ड्रग्स तस्करी या अन्य संगीन आपराधिक मामलों में जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। यही नहीं, नेताओं के मन में खौफ पैदा करने के लिए एनआईए, सीबीआई और ईडी जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसियों के छापों का डर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी तोडऩे के लिए साम-दाम-दंड-भेद का सहारा लिया जा रहा है; जहां कुछ को मोटी रकम का लालच मिल रहा है, वहीं बाकी लोगों को उनके परिवार की सुरक्षा का वास्ता देकर डराया जा रहा है। ममता बनर्जी ने भाजपा नेतृत्व को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली या राज्य की सत्ता कभी भी किसी के पास स्थायी रूप से नहीं रहती। आज भले ही वक्त भाजपा के अनुकूल हो और उनके 'अच्छे दिन' चल रहे हों, लेकिन समय बदलते देर नहीं लगती और जब सियासी हालात करवट लेंगे, तब उन्हें भी इन सभी ज्यादतियों का पाई-पाई का हिसाब देना होगा। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का विशेष रूप से बचाव करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने राजनीतिक दुश्मनी के चलते सीधे अभिषेक को निशाने पर लिया है और उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए बाहर से शूटरों या आपराधिक तत्वों को लाने तक की कोशिश की गई।
लाइव सत्र के आखिरी हिस्से में पूर्व मुख्यमंत्री ने हाल ही में दमदम और हावड़ा जैसे स्टेशनों के पास चले बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार की इस नीति को पूरी तरह गरीब-विरोधी बताते हुए कहा कि सुरक्षा और आधुनिकीकरण के नाम पर फुटपाथ दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं और दूध बेचने वाले बेहद छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी को बेरहमी से छीना जा रहा है। ममता के इन बेहद आक्रामक और गंभीर आरोपों ने बंगाल की राजनीति में एक नया और भीषण उबाल ला दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों धुर विरोधी दलों के बीच यह जमीनी और कानूनी टकराव और ज्यादा हिंसक और तीखा रूप अख्तियार कर सकता है।

