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उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष समेत कई नेताओं ने दी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष समेत कई नेताओं ने दी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि

Taaza TV Hindi 2 weeks ago

पराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई नेताओं ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों, एकजुटता, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत बनाने के सामूहिक प्रयासों को पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई नेताओं ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों, एकजुटता, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत बनाने के सामूहिक प्रयासों को पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सोमवार को उपराष्ट्रपति भवन में डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिक्षाविद, दूरदर्शी राजनेता और राष्ट्रनिर्माता के तौर पर डॉ. मुखर्जी ने भारत की शैक्षिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक यात्रा पर गहरी छाप छोड़ी। कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के उपकुलपतियों में से एक, संविधान सभा के सदस्य, अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष, स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री और भारतीय जनसंघ के संस्थापक के रूप में उन्होंने देश की असाधारण सेवा की।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के पक्के समर्थक के तौर पर उन्होंने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय के प्रयास में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका जीवन एवं आदर्श, एक मजबूत, एकजुट, आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने के सामूहिक प्रयासों में पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में डॉ. मुखर्जी को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रसेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जहां एक शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया, वहीं एक जननेता के रूप में राष्ट्रीय हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी स्पष्ट प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उन्होंने एक सशक्त, समरस एवं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को अपने विचारों और कर्मों से निरंतर बल प्रदान किया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और जनकल्याण के प्रति उनका समर्पण आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र प्रथम के आदर्श को अपने जीवन का ध्येय बनाया। बंगाल के विभाजन के समय उनका दूरदर्शी नेतृत्व और जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और देश की अखंडता के लिए उनका आजीवन संघर्ष युवाओं को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने विचारों और कर्म में हमेशा 'राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम' की भावना को सर्वोपरि रखा। दृढ़ संकल्प, निर्भीकता, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान थी। भारतीय जनसंघ के संस्थापक तथा भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक अग्रदूत के रूप में उन्होंने राष्ट्रवाद की उस विचारधारा को सशक्त आधार प्रदान किया, जिसने भारत की राजनीति को नई दिशा दी। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा के प्रति मुखर्जी का अटूट समर्पण आज भी करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुखर्जी ने 'एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे' का उद्घोष कर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाने के लिए व्यापक आंदोलन किया। भारतीय के गौरव एवं सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। देश की एकता और अखंडता के लिए जब-जब संघर्ष की गाथाएं लिखी जाएंगी, तब-तब उनका नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा। जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने राष्ट्र को एक वैचारिक विकल्प प्रदान किया और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को जन-जन के हृदय में स्थापित किया। उनका त्याग, तप और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत की सम्प्रभुता और एकता के लिए डॉ. मुखर्जी का अतुलनीय संघर्ष एवं त्याग अविस्मरणीय है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान, नहीं चलेंगे' का उद्घोष कर उन्होंने राष्ट्र की एकता व अखंडता के संकल्प को नई संजीवनी दी एवं अपना बलिदान देकर संपूर्ण राष्ट्र को जागृत किया। 'अखंड भारत' के प्रति उनका समर्पण हम सभी को नई प्रेरणा, नई ऊर्जा और नई शक्ति से भर देता है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन अडिग राष्ट्रप्रेम का प्रतीक था। पंडित नेहरू की मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देकर उन्होंने भारतीय राजनीति को सशक्त वैचारिक विकल्प दिया। राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना उनके जीवन का मूल मंत्र था। विभाजन के समय पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने का उनका संघर्ष और राष्ट्र की एकता व अखंडता की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

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