लखनऊ। सोमवार भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रीयवाद ने एलडीए कार्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान हसिया, लाठी और डंडा लेकर पहुंचे। जमीनों का मुआवजा समेत विभिन्न मांगों को लेकर एलडीए के खिलाफ नारेबाजी की।
जो न माने झंडे से उसे समझाओ डंडे से नारे लगाए। किसानों की एलडीए के अधिकारियों के बीच नोंक झोंक हुई।
संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक यादव ने कहा कि 40 वर्ष पूर्व 1984 में हमारी जमीन लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा अधिकृत कर ली गई थी। उस समय 84 पैसे के हिसाब से मुआवजा तय हुआ। हम लोगों ने फिर वार्ता किया, तो मुआवजा 2.5 रुपए हुआ। कुछ लोग कोर्ट चले गए। इसके बाद 4 रुपए 60 पैसे दर के हिसाब से तय हुआ। 2016 में अंतिम मोहर कोर्ट के द्वारा लगी कि 4.60 पैसे सभी किसानों को दिया जाए।
अब एलडीए कह रहा है कि हमारे पास पर्याप्त धनराशि नहीं है, इसलिए हम मुआवजा नहीं दे पाएंगे। जमीन अधिकृत करते समय विभिन्न प्रकार की सुविधा देने की बात कही थी। उसमें मुख्य रूप से प्रत्येक परिवार को नौकरी, आवास, गांव का विकास और किसान भवन समेत तमाम चीजें शामिल थीं। सैंकड़ों बार वरी का घेराव किया , कलेक्ट्रेट गए , मुख्यमंत्री आवास के मगर कहीं भी सुनवाई नहीं हुई।
प्रदर्शन में शामिल किसान विकास ने कहा एलडीए द्वारा किए गए दावे धरातल पर लागू नहीं हुए। विगत कई सालों से लखनऊ विकास प्राधिकरण की आला अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं मगर सुनवाई नहीं हो रही है। सारी चीज हमारे पास लिखित में मौजूद हैं। फिर भी सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। हम किसानों को सरकार और अधिकारी दोनों मिलकर गुमराह कर रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि दौड़ते दौड़ते हम लोग परेशान हो गए हैं।
शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हैं, ना दिखाई पड़ता है, ना चल पाते हैं। फिर भी मजबूरी में बार-बार यहां आना पड़ता है। भीषण गर्मी में हम लोग छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर प्रदर्शन करने आ रहे हैं।अगर हम लोगों को मुआवजा मिल जाए। चबूतरे मिल जाएं, तो छोटा-मोटा व्यापार कर लें। मुआवजा न मिलने की वजह से दूसरों के घरों में काम करना पड़ रहा है।

