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अयोध्या में चंदा चढ़ावा में लूट भगवान श्रीराम के भक्तों के साथ विश्वासघात- प्रमोद तिवारी

अयोध्या में चंदा चढ़ावा में लूट भगवान श्रीराम के भक्तों के साथ विश्वासघात- प्रमोद तिवारी

लालगंज, प्रतापगढ़। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के दरबार मे जिस तरह की लूट की गयी है यह सीधे तौर पर भगवान श्रीराम के भक्तों के साथ विश्वासघात है।

उन्होने कहा कि अयोध्या में एक सौ चौबीस करोड़ रूपये भगवान श्रीराम के मन्दिर के उदघाटन प्राण प्रतिष्ठा समेत विविध कार्यक्रमों में खर्च कर दिए गए। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जन्मभूमि पर झण्डा फहराने के लिए दस करोड़ रूपये और पाण्डाल लगाने के नाम पर एक सौ चौदह करोड़ रूपये खर्च किये गये।

उन्होने कहा कि इन कार्यक्रमों के नाम पर इतनी बड़ी धनराशि के खर्च होने को लेकर एसआईटी के द्वारा भी ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप सत्यापन की प्रक्रिया से भी इतनी बड़ी धनराशि का खर्च किया जाना समझ से परे है। उन्होने कहा कि कार्यक्रमों के नाम पर करोड़ों की धनराशि को मनमाना खर्च करना भी खुली लूट को जाहिर करता है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 1980 में बतौर प्रदेश के तत्कालीन पर्यटन मंत्री के रूप में श्रीराम कथा पार्क के निर्माण में स्वयं के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि आज श्रीराम जन्मभूमि पर आस्था को ताक पर रखकर इस प्रकार की लूट और डकैती का दृश्य श्रीराम भक्तों के साथ हर देशवासी के लिए पीड़ाजनक है। उन्होने कहा कि इंसान के साथ धोखा तो भगवान माफ भी कर सकते हैं पर जिन्होंने स्वयं भगवान श्रीराम के साथ धोखा और पाप किया है उन्हें दुनिया में कोई नहीं माफ कर सकता है। सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि धर्म के नाम पर भगवान श्रीराम के भक्तों से हुई इस लूट के लिए जनता तथा श्रीराम भक्तों को भाजपा सरकार को सजा देने के लिए तैयार रहना चाहिए। अयोध्या में भगवान श्रीराम के मन्दिर में चन्दा के चढ़ावे पर हुई लूट को लेकर सोमवार को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे करोड़ो राम भक्तों के लिए बेहद निराशा हताशा तथा दुखद कहा है।

उन्होने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरि को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिन पर कोष की रक्षा व देखरेख की जिम्मेदारी है उनके रहते भगवान श्रीराम के चंदे चढ़ावे में चोरी हो गयी। उन्होने सवाल उठाया कि यदि कोष में हेराफेरी और लूट हुई तथा बरामदगी भी हो गयी तो क्या इसके लिए स्वयं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरि जिम्मेदार नही है? उन्होने कहा कि जिम्मेदारी तय करने की जगह आश्चर्य है कि कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव प्रेस कान्फ्रेंस के जरिए इस प्रकरण के सबसे चर्चित मुख्य आरोपी चंपत राय तथा अनिल मिश्र का बचाव कर रहे हैं। उन्होने कहा कि ऐसी स्थिति में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जैसे पदाधिकारियों से न्याय व इंसाफ की उम्मीद नही की जा सकती है।

सांसद प्रमोद तिवारी ने गंभीर सवाल दागा है कि क्या चंपत राय और अनिल मिश्र का इस्तीफा देना एक नाटक था। उन्होने कहा कि यह सवाल गहरा गया है जब पाराशर जी ने स्पष्ट कह दिया कि एक बार यदि इस्तीफा हो गया तब उसे वापस नहीं लिया जा सकता। उन्होने कहा कि पाराशर जी का मंतव्य दृढ़ता के साथ सामने न आता तब यह तय था कि इस्तीफा देना महज एक नाटक ही था। उन्होने कहा कि भगवान श्रीराम का मन्दिर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से बना है। उन्होने कहा कि भाजपा ने भगवान श्रीराम का मन्दिर नहीं बनवाया है। उन्होंने धर्म के नाम पर चंदे चढ़ावे में खुली लूट के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए इस सम्पूर्ण मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश की देखरेख में कराए जाने की मांग उठाई है। सांसद प्रमोद तिवारी का बयान मंगलवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत किया गया है।

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