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भारतीय रिट्स बाजार की मजबूत बढ़त;

भारतीय रिट्स बाजार की मजबूत बढ़त;

मुंबई। भारत का रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रिट्स) बाजार जबरदस्त तेजी देख रहा है, जो न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अपने एशियाई समकक्षों के मुकाबले भी एक आकर्षक निवेश विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहा है।

नरेडको महाराष्ट्र नेक्स्टजेन (NAREDCO Maharashtra NextGen) द्वारा आयोजित फिनक्लेव 'एक्सेलरेट 2026' के मुंबई मे हुए फिनक्लेव के दौरान जारी ॲनारॉक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत बुनियादी ढांचे, नियामक समर्थन और बढ़ते निवेशक विश्वास के कारण यह क्षेत्र तेजी से एक परिपक्व और उच्च प्रदर्शन वाली संपत्ति श्रेणी में विकसित हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में स्मॉल एंड मीडियम रिट्स की शुरुआत ने रियल एस्टेट निवेश को और सक्षम बनाया है, जिससे 'फ्रैक्शनल ओनरशिप' मॉडल के माध्यम से खुदरा भागीदारी आसान हुई है। इससे रू. 67,000 से रू. 71,000 करोड़ रुपये के मुद्रीकरण (monetisation) के अवसर खुलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट एशियाई बाजारों के मुकाबले भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर जोर देती है, क्योंकि इसने हांगकांग जैसे परिपक्व केंद्रों के बराबर पैमाना हासिल कर लिया है। इसके अलावा, भारतीय रिटस् ने लगभग 9% का बेहतर 5 वर्षीय मूल्य रिटर्न दिया है, जो कई क्षेत्रीय देशों से बेहतर है, साथ ही इनका डिस्ट्रीब्यूशन यील्ड 5-6% के बीच प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, परिचालन प्रदर्शन भारत की रिट्स के सफलता की कहानी का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। भारतीय रिट्स में पोर्टफोलियो ऑक्युपेंसी का स्तर लगातार 90% से ऊपर रहा है, जिसमें प्रौद्योगिकी, बैंकिंग और फाइनेंशियल (वित्तीय) सर्व्हिसेस, परामर्श और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों की वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। लीजिंग की गति को लेकर सकारात्मक रहते हुए रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में अखिल भारतीय कार्यालय पट्टे (leasing) की गतिविधियों में रिट्स की हिस्सेदारी 20% से अधिक थी।

टैक्स में मिलने वाली छूट रिट्स के आकर्षण को बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण है। नियामक नियमों के अनुसार, रिट्स के लिए अपने शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह का कम से कम 90% वितरित करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, 65% से अधिक वितरण निवेशकों के हाथ में कर-मुक्त होता है, जिससे टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न काफी बढ़ जाता है।

रिपोर्ट में भारत के रिट्स बाजार के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का अनुमान लगाया गया है क्योंकि वर्तमान में भारत की केवल 32% 'रिट्स-योग्य' संपत्तियां ही सूचीबद्ध हैं, जो विस्तार की बड़ी गुंजाइश छोड़ती हैं। लॉजिस्टिक पार्क, डेटा सेंटर, स्वास्थ्य सेवा और आवासीय रियल एस्टेट जैसे उभरते क्षेत्रों में विस्तार से निवेश का परिदृश्य और व्यापक होगा।

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