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दलित - मुस्लिम कार्ड खेलने की तैयारी में कांग्रेस

दलित - मुस्लिम कार्ड खेलने की तैयारी में कांग्रेस

खनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भले ही अभी वक्त हो लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी है। इसी क्रम में कांग्रेस ने यहां दलित - मुस्लिम कार्ड खेलने की तैयारी तेज कर दी है।

प्रदेश प्रभारी की कमान दलित नेता राजेन्द्र पाल गौतम को सौपने के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी किसी मुस्लिम नेता को लाने की कवायद तेज हो गयी है। यह भी चर्चा है कि पश्चिमी यूपी से किसी मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाया जाए, इस रेस में सहारनपुर सांसद इमरान मसूद आगे है।

देश मेंं इंडिया गठबध्ांन को कांग्रेस लीड कर रही है। यूपी में कांग्रेस का सपा के साथ एलायंस है। 2027 में भी यह गठबंधन बरकरार रहेगा या नहीं इस पर संसय बना हुआ है। क्योंकि पार्टी में दूसरे कतार के नेताओं के बयान विरोधाभाषी है वह सम्मानजनक एवं बराबरी का समझौता करने की बात दोहरा रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने यूपी प्रभारी की कमान अविनाश पाण्डेय से लेकर कद्दावर दलित नेता राजेन्द्र पाल गौतम को सौंपी है। अब प्रदेश अध्यक्ष को लेकर रस्साकसी तेज हो गयी है। कुछ लोगों का तर्क है कि वर्तमान अध्यक्ष अजय राय बने रहेंगे। वहीं कुछ नेताओं का तर्क है कि मुस्लिम बाहुल पश्चिमी यूपी से किसी कद्दावर नेता को सौपा जाएगा। इस पद के लिए सहारनपुर सांसद इमरान मसूद, जौनपुर से पूर्व विधायक नदीम जावेद, पूर्व सांसद इमरान प्रतापगढ़ी सहित कई नामों पर चर्चा हो रही है। इसमें इमरान मसूद को सबसे आगे माना जा रहा है।

पश्चिमी यूपी में मुस्लिमों की आबादी 20 से 40 प्रतिशत तक है। इसीलिए अधिकांश मुस्लिम सांसद एवं विधायक इसी क्षेत्र से चुन कर आते हैं। सहारनपुर में जाट, मुस्लिम, र्गुजर, दलित एवं पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व है। शायद इसीलिए इधर बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां के कई दौरा किया। प्रदेश में निर्वाचित 34 मुस्लिम विधायकों में 21 इसी क्षेत्र के है। इसी तरह यूपी में 5 मुस्लिम सांसदों में चार वेस्ट यूपी के ही है। इस तरह आबादी के अनुरूप में मुस्लिमों का सियासी प्रतिनिधित्व बेहद कम है। इसलिए मुस्लिमों पर दांव लगाने की संभावना प्रबल है।

दलित प्रभारी बनाने के पीछे कांग्रेस के कई अहम कारण है। पूर्व में यह 23 प्रतिशत वोट बैक पार्टी का बेस वोट बैंक हुआ करता था जो राम मंदिर आंदोलन के बाद बसपा में शिफ्ट हुआ लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद अब अधिकांश वोटर बीजेपी का गुणगान कर रहे हैं। इसके पीछे केन्द्र एवं राज्य सरकार की लाभकारी योजनाएं है। यूपी विधानसभा में 80 सीटें सुरक्षित है जिसमें से भाजपा के सर्वाधिक एमएलए है। इस तरह कांग्रेस दलितों की 23 प्रतिशत एवं मुस्लिमों की करीब 19 फीसदी आबादी के सहारे सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करने के छटपटा रही है।

यूपी को 4 जोन में बांटने की कवायद

पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद मिश्र ने बताया कि अब कांग्रेस किसी भी मामले में कमजोर नहीं है। इसलिए चुनावी गठबंधन भी कृपा पात्र से नहीं बल्कि सम्मानजनक एवं बराबरी का होना चाहिए। पार्टी सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि हाईकमान यूपी को चार जोन में बांट सकता है जिसमें हर प्रमुख जाति को क्षेत्रीय अध्यक्ष की कमान सौपी जा सकती है। प्रदेश अध्यक्ष को लेकर असमंजस है, लेकिन मुस्लिम चेहरे को जिम्मेदारी मिल सकती है। एक माह के भीतर प्रदेश से लेकर बूथ तक संगठन तैयार करने के लिए कार्य आरंभ हो गया है। प्रभारी राजेन्द्र पाल ने पालिटिकल अफेयर्स कमेटी, निर्वतमान प्रदेश टीम एवं जिला शहर अध्यक्षों के साथ बैठक कर चुके हैं। 8 जुलाई से पार्टी कार्यालय में ही प्रवास कर संगठन को मजबूत करने की कार्य करेंगे।

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