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डॉक्टरों ने मरीज के सीने से निकाला 2.5 किलोग्राम का ट्यूमर

डॉक्टरों ने मरीज के सीने से निकाला 2.5 किलोग्राम का ट्यूमर

खनऊ। केजीएमयू के डॉक्टरों ने मरीज के सीने से 2.5 किलोग्राम का ट्यूमर निकलकर नया जीवनदान दिया। पहले मरीज को ट्यूमर की वजह से उसका दायां फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ गया था।जिससे ट्यूमर दिल तथा मुख्य धमनी (एओर्टा) पर भारी दबाव डाल रहा था।

इसकी वजह से मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ, अत्यधिक थकान, बुखार और सीने के दोनों तरफ दर्द जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। हालांकि अब पूरी तरह स्वास्थ है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्‍टरों ने बताया मरीज को सबसे पहले जून 2025 में सांस फूलने और धड़कन तेज होने की शिकायत हुई थी। शुरुआत में बाहर के अस्पतालों में इस बीमारी का गलत इलाज किया जा रहा था। बीमारी को टीबी और अन्य ट्यूमर समझ लिया गया था। मरीज शगुन यादव को सबसे पहले जून 2025 में सांस फूलने और धड़कन तेज होने की शिकायत हुई थी। स्थानीय डॉक्टर जनवरी 2026 तक सामान्य दवाओं से इलाज करते रहे। इस दौरान बीमारी की सही वजह जानने के लिए कोई जांच नहीं कराई गई ।
जनवरी 2026 में पहली बार छाती का एक्स-रे हुआ। रिपोर्ट में दायां फेफड़ा पूरी तरह से सफेद (व्हाइट-आउट) दिखा। बाहर के एक अस्पताल में सीने में नली डालकर पानी निकाला गया। इसके बाद मरीज को टीबी की दवाएं शुरू कर दी गईं। टीबी की दवा चलने के बावजूद मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बजाय उसे बुखार और उल्टी होने लगी। मार्च 2026 में सीने में फिर से मवाद भर गया। बाद में मरीज को विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां सीटी स्कैन और बायोप्सी में 'पल्मोनरी हैमार्टोमा' नामक ट्यूमर होने की बात कही गई। डॉक्टरों ने फेफड़े का एक हिस्सा निकालने की सर्जरी की सलाह दे दी थी। लगातार बिगड़ती हालत के बीच मरीज अप्रैल 2026 में केजीएमयू पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने बारीकी से रिपोर्ट देखी। उन्हें 'जर्म सेल ट्यूमर' (टेराटोमा) की आशंका हुई। दोबारा सीटी स्कैन और बायोप्सी कराई गई । इसमें सीने के अगले हिस्से में 'मैच्योर टेराटोमा' होने की पुष्टि हुई। ट्यूमर इतना विशाल था कि मरीज के दिल की धड़कन 150 प्रति मिनट तक पहुंच गई थी। ट्यूमर हृदय पर खतरनाक दबाव बना रहा था। 21 अप्रैल 2026 को जनरल सर्जरी विभाग के प्रो. सुरेश कुमार के नेतृत्व में मरीज का ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों ने सीने ( एंटीरियर मेडियास्टिनम ) से 2.5 किलो वजन का यह विशाल ट्यूमर बाहर निकाला। 4-5 घंटे तक चली यह सर्जरी बेहद जटिल थी। सर्जरी के दौरान जैसे ही ट्यूमर का दबाव हटा, मरीज का सिकुड़ा हुआ दायां फेफड़ा पूरी तरह से फैल गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया। मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। 9वें दिन सीने की नली निकालकर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज शगुन यादव ने डॉ.सुरेश और उनकी पूरी टीम का नया जीवन देने के लिए आभार व्यक्त किया है। शगुन के पिता विमल कुमार यादव और बहन मुस्कान यादव ने भी सही मार्गदर्शन और सफल सर्जरी के लिए केजीएमयू के डॉक्टरों को धन्यवाद दिया है। पेशेंट शगुन यादव ने बताया कि वह पिछले एक साल से सांस लेने में भारी तकलीफ, अत्यधिक थकान, बुखार और सीने के दोनों तरफ दर्द जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। इस साल की शुरुआत में मेरी हालत और बिगड़ गई। सीने में दर्द के कारण भूख और नींद उड़ गई थी और जनवरी में एक हफ्ते तक लगातार तेज बुखार रहा। एक्स-रे में मेरे दाहिने फेफड़े में पानी भरने का पता चला, जिसके बाद 28 से 30 जनवरी तक आईसीडी ट्यूब डाली गई। इसके बाद एक महीने तक मेरी टीबी की दवा चली, लेकिन मुझे कोई आराम नहीं मिला। इसके बाद मुझे दस दिनों के लिए विवेकानंद पॉलीक्लिनिक में एक चेस्ट स्पेशलिस्ट की देखरेख में भर्ती कराया गया। दुर्भाग्य से, वहां 'हमार्टीमा का गलत निदान किया गया और इस दौरान मेरी स्थिति और भी अधिक खराब हो गई। कई महीने भटकने के बाद अप्रैल 2026 में हम केजीएमयू के सर्जन डॉ. सुरेश कुमार के पास पहुंचे। यहां सही जांच बीमारी का पता चला कि मुझे 'टेराटोमा' है और इसके लिए तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है। केजीएमयू में मुझे डॉ. सुरेश कुमार की टीम ने 4-5 घंटे तक चली एक बेहद जटिल सर्जरी से नया जीवन दिया है। डॉ.सुरेश और उनकी पूरी टीम ने मुझे एक नया जीवन दिया है।

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