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एसपी, डीटीओ , डीएमओ के संरक्षण में कोयले का काला कारोबार ! माफिया बांटते है करोड़ों - करोड़

एसपी, डीटीओ , डीएमओ के संरक्षण में कोयले का काला कारोबार ! माफिया बांटते है करोड़ों - करोड़

पटना, 03 जूलाई ( तरूणमित्र ) । भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बातें तकिया कलाम बन कर रह गयी है । सरकार के नुमाइंदे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बातें कर समाचार में सुर्ख़ियां बटोरने का काम कर रहें है ।

अगर वाक़ई भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत कार्रवाई होती तो प्रतिवर्ष केन्द्र सरकार व झारखंड सरकार को 10 हज़ार करोड़ का नुक़सान नहीं होता । वित्तीय संकट से जूझ रहा बिहार को भी प्रतिवर्ष 1000-1200 चूना लग रहा है ।

झारखंड से लेकर बिहार तक कोयला का काला कारोबार संबंधित जिलों के एसपी, डीटीओ, डीएमओ सहित पुलिस- प्रशासन के संरक्षण में चल रहा है । बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य सीमा में पदस्थापित आईजी, डीआईजी व जिले के एसपी को विशेष निगरानी रखने का आदेश दिया हैं लेकिन आज भी पासिंग का खेल चल रहा है और धनबाद से बड़े पैमाने पर निकल रहा अवैध कोयला बिहार के कोने- कोने तक पहुंच रहा है ।

इसी तरह कोयला माफिया प्रति माह बिहार के संबंधित जिलों के साहबों तक कोयला के काले कारोबार का हिस्सा पहुंचा देते हैं और भ्रष्टाचार का यह खेल बदस्तूर जारी है । ऐसी चर्चा है की बिहार के एक आईपीएस ने कोयला के काले कारोबार से कमाएं है 50-100 करोड़ ।

बिहार के दो ज़िले से बिना चालान प्रवेश कर रहा ट्रक, कोने- कोने में पहुंच रहा कोयला

धनबाद से निकल रहा अवैध कोयला का कारोबार झारखंड से लेकर बिहार के कोने- कोने में फैला हुआ है । केंद्र सरकार व झारखंड सरकार को बड़े पैमाने पर नुक़सान हो रहा है उसका आकलन उन्हें करना है । वित्तीय संकट से जूझ रही बिहार सरकार को कोयला के काले कारोबार से नुक़सान हो रहा है । बिहार खनिज नियमावली के अनुसार दूसरे राज्यों से अगर बिना चालान का कोयला आता है तो फाइन का प्रावधान बनाया गया है । इसके अलावा कई और टैक्स भी राज्य सरकार के खाते में आएगी । धनबाद से बिहार राज्य में प्रवेश करने का मुख्य तीन सड़क मार्ग है :

1. धनबाद से > गोमो>कोडरमा>बाराचट्टी>गया जिला में प्रवेश

2. धनबाद से > निरसा>चिरकुंडा >झाझा>जमुई

3. धनबाद से गोविंदपुर > देवघर >चकाई > जमुई जिला में प्रवेश

इस तरह धनबाद से निकलकर बिहार के सभी जिले के कोने- कोने में पहुंच रही अवैध कोयला मुख्य रूप से बिहार के जमुई जिले एवं गयाजी जिले से प्रवेश करती है । दोनों जिला के सीमा पर निगरानी के लिए चेक पोस्ट के साथ बैरियर लगाया हुआ है और पुलिसकर्मी, एमवीआई, माइनिंग के पदाधिकारी तैनात हैं इसके बावजूद बिना चालान का कोयला जमुई और गयाजी में प्रवेश करता है और बिहार के सभी जिले में पहुंचता है ।

पासिंग के खेल में जमुई व गयाजी जिला तो शामिल है ही इसके साथ गया से पटना, गया से औरंगाबाद - भोजपुर - कैमुर- बक्सर , पटना होते हुए उत्तरी बिहार के सभी जिला । इधर जमुई से प्रवेश कर शेखपुरा , नालंदा, नवादा, बांका-भागलपुर होते हुए बिहार में कोने - कोने तक बिना चालान का कोयला पहुंचता है । कोयला के अवैध कारोबार में शामिल सिंडिकेट सभी जिले में पासिंग के लिए पुलिस- प्रशासन को हिस्सा पहुंचाने का काम करते है यहीं कारण है की बिना चालान के धनबाद से जमुई व गयाजी होते हुए बिहार में आ रहीं ट्रकों को नहीं पकड़ा जाता है । जिसके कारण बिहार सरकार को प्रतिवर्ष 1000-1200 करोड़ का नुक़सान हो रहा है ।

बिहार के ईंट भट्ठों पर आता है बड़े पैमाने पर अवैध कोयला

बिहार में बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठा है । ईंट भट्ठा के संचालन के लिए कोयला की आवश्यकता होती है । कुछ लोगों को छोड़ दें तो धनबाद और रामगढ़ से बिना चालान का कोयला आता है । सभी ईंट भट्ठों पर कोयला को स्टॉक करके रखा हुआ रहता है । अब तो बरसात का मौसम आ गया फिर भी जांच हुई तो ईंट भट्ठे वाले के पास कोई जवाब नहीं होगा । ईंट भट्ठा की जांच के लिए माइनिंग डिपार्टमेंट जाती है तो ईंट और भट्ठा संचालित नियमों की जांच करती है लेकिन कोयला की आयात की सोर्स की जांच नहीं करती है । कोयला से जुड़े एक भी खबर माइनिंग डिपार्टमेंट शेयर नहीं करती है चुकी कोयला के पासिंग के खेल में माइनिंग डिपार्टमेंट पुरी तरह से जुड़ा हुआ है ।

सीबीआई को क्या पता नहीं है अवैध कोयला कारोबार

झारखंड के कोयला घोटाला 2742 करोड़ की जांच सीबीआई कर रही है । कोयला घोटाला ने कई के चरित्र और चेहरे को काला करने का काम किया है । धनबाद से बिना चालान के निकल रहे कोयला से संकेत दे रहे हैं की बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन किया जा रहा है । झारखंड से बिहार तक फैला कोयले के काले कारोबार में दोनों राज्यों के विशेषकर पुलिस, माइनिंग व परिवहन विभाग शामिल है । अभी भी कोयला घोटाले की जांच जारी है । अनुसंधान की कोई सीमा निर्धारित नहीं है , सुप्रीम कोर्ट का भी स्पष्ट कहना है की अनुसंधान में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है फिर कोयला घोटाले की जांच कर रही सीबीआई झारखंड- बिहार तक फैले अवैध कोयला कारोबार में शामिल लोगों की जांच क्यों नहीं कर रही है ।

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