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गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी बढ़कर चार से छह

गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी बढ़कर चार से छह

खनऊ। गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण गर्भावस्था अवधि के दौरान न्यूनतम छह प्रसव पूर्व जांच ( एंटीनाटल चेकअप-एएनसी ) सुनिश्चित किए जाने का निर्णय लिया गया है। अब तक यह संख्या न्यूनतम चार एएनसी तक सीमित थी।

इस संबंध में नई गाइडलाइन परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. एच.डी. अग्रवाल द्वारा जारी की गई है।
क्वीन मेरी अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने बताया कि छह एएनसी सुनिश्चित किए जाने से गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की नियमित एवं सघन निगरानी संभव हो सकेगी। इससे गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की समय रहते पहचान और उनका प्रभावी प्रबंधन किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि एनीमिया, गर्भावधि मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज), उच्च रक्तचाप तथा भ्रूण के विकास से संबंधित समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित होने से कम वजन वाले नवजात शिशुओं, समयपूर्व जन्म तथा अन्य नवजात जटिलताओं में कमी लाने में मदद मिलेगी। डॉ.अग्रवाल ने बताया कि नई व्यवस्था से फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की फॉलो-अप विजिट भी अधिक प्रभावी होंगी। इनके माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पोषण, आयरन-फोलिक एसिड एवं अन्य आवश्यक दवाओं के सेवन, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, संभावित जटिलताओं, प्रसव की तैयारी तथा नवजात शिशु की देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही नवजात में खतरे के लक्षणों की पहचान के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

गर्भावस्था के प्रत्येक चरण में होगी नियमित स्वास्थ्य जांच
नई गाइडलाइन के अनुसार एएनसी का समय निर्धारण इस प्रकार किया गया है-

पहली एएनसी: गर्भावस्था के पंजीकरण के तुरंत बाद, 12 सप्ताह के भीतर
दूसरी एएनसी: 16 से 20 सप्ताह के बीच
तीसरी एएनसी: 24 से 28 सप्ताह के बीच
चौथी एएनसी: 28 से 32 सप्ताह के बीच
पाँचवीं एएनसी: 32 से 36 सप्ताह के बीच
छठी एएनसी: 36 से 40 सप्ताह के बीच

गाइडलाइन के अनुसार दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कम से कम एक एएनसी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के अंतर्गत अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार, रेफरल और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6, 2023-24) के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में लगभग 52 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने चार प्रसव पूर्व जांचें करवाई हैं। ऐसे में सभी गर्भवती महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व सेवाएं पहुंचाना तथा शत-प्रतिशत महिलाओं को निर्धारित एएनसी उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के साथ-साथ प्राथमिकता भी है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Tarun Mitra Hindi