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इंडोनेशिया की संसद में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, बोले- UNSC सुधार अब और नहीं टल सकता

इंडोनेशिया की संसद में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, बोले- UNSC सुधार अब और नहीं टल सकता

  • UNSC सुधार पर भारत का स्पष्ट संदेश
  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम
  • आतंकवाद और BRICS पर भी चर्चा

जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया के लिए अनेक क्षेत्रों में असीम अवसर मौजूद हैं और तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि दोनों देश स्वाभाविक साझेदार हैं और भारत उपग्रह प्रक्षेपण प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में इंडोनेशिया को हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और भारत एवं इंडोनेशिया जैसे विकासशील देश समान भागीदारी और अधिक भूमिका की अपेक्षा रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया में अब और देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि वैश्विक संस्थाएं वर्तमान वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सकें।

उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया भविष्य के स्वाभाविक साझेदार हैं तथा दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सामरिक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

भारत इंडोनेशिया को उपग्रह प्रक्षेपण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग देने के लिए तैयार है और अंतरिक्ष सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मुक्त, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रबल समर्थक है तथा समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता में विश्वास रखता है।

उन्होंने कहा कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति पूरी तरह आसियान केंद्रित है और आसियान की केंद्रीय भूमिका भारत की इंडो-पैसिफिक नीति का आधार है।

आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद इंडोनेशिया ने भारत के साथ एकजुटता दिखाई, जिसके लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' है, जबकि इंडोनेशिया विश्व का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है। दोनों देशों ने विविधता को अपनी लोकतांत्रिक एकता की नींव बनाया है और यही साझा मूल्य दोनों देशों के संबंधों की सबसे बड़ी ताकत हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल समुद्र ही साझा नहीं करते बल्कि दोनों देशों का साझा इतिहास, संस्कृति और सभ्यतागत विरासत भी है।

रामायण, महाभारत, नालंदा, बोरोबुदुर, प्रम्बानन मंदिर, गरुड़ और बाली की सांस्कृतिक परंपराएं दोनों देशों को सदियों से जोड़ती रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की लड़ाई में भी संयुक्त राष्ट्र में उसका मजबूत समर्थन किया था।

मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की है, वहीं भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है तथा इंडोनेशिया में 100 से अधिक भारतीय कंपनियां कार्यरत हैं लेकिन सहयोग की संभावनाएं अभी भी असीम हैं।

ब्रिक्स का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष इंडोनेशिया इसका पूर्ण सदस्य बना और इस वर्ष भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ब्रिक्स को अधिक व्यवहारिक, संतुलित और ग्लोबल साउथ की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में कार्य कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 'गंगा-महाकम विजन' प्रस्तुत करते हुए भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के लिए चार प्रमुख स्तंभों का प्रस्ताव रखा।

इनमें सभ्यतागत संबंधों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए भारत-इंडोनेशिया सिविलाइजेशन डायलॉग की शुरुआत, साझा विकास के माध्यम से नए अवसरों का सृजन, सुरक्षा एवं सामरिक विश्वास को मजबूत करना तथा साझा समुद्री भूगोल को साझा समृद्धि में बदलने के लिए समुद्री सहयोग को नई दिशा देना शामिल है।

अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की जनता द्वारा मिले स्नेह और स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त करना 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है और यह दोनों देशों की लोकतांत्रिक परंपराओं, साझा विरासत तथा प्रगाढ़ होते संबंधों का प्रतीक है।

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