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महापुरुषों की प्रतिमाएं राष्ट्र की चेतना, भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अमर स्रोत -जयवीर

महापुरुषों की प्रतिमाएं राष्ट्र की चेतना, भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अमर स्रोत -जयवीर

खनऊ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसके महापुरुषों, उसके इतिहास और उसकी संस्कृति से होती है। प्रतिमाएँ केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत प्रतीक हैं।

सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित ये प्रतिमाएँ नई पीढ़ी को निरंतर यह संदेश देती हैं कि महान व्यक्तित्वों ने अपने जीवन से राष्ट्र और समाज के लिए किन आदर्शों की स्थापना की। यही कारण है कि प्रदेश सरकार महापुरुषों की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाकर उन्हें जन-जन की प्रेरणा का स्रोत बना रही है। जयवीर सिंह ने आज यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगभग 43 महापुरुषों, राष्ट्रनायकों एवं संत-महात्माओं की प्रतिमाएँ स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 14 प्रतिमाएँ पूर्ण होकर स्थापना के लिए तैयार हैं, जिन्हें आगामी एक-दो माह में स्थापित किया जाएगा। वहीं 17 अन्य प्रतिमाओं के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा उनका निर्माण कार्य प्रगति पर है।

मंत्री ने बताया कि वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की साढ़े बारह फीट ऊँची अश्वारोही कांस्य प्रतिमाएँ एटा, बलिया, फिरोजाबाद तथा सिरसागंज (मैनपुरी) सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित की जा चुकी हैं। वाराणसी एवं मुरादाबाद में उनकी प्रतिमाएँ स्थापना के लिए तैयार हैं, जबकि देवलास (मऊ) एवं बाराबंकी में उनका निर्माण कार्य चल रहा है। इसी प्रकार सम्राट पृथ्वीराज चौहान, छत्रपति शिवाजी महाराज तथा रानी लक्ष्मीबाई की साढ़े बारह फीट ऊँची अश्वारोही कांस्य प्रतिमाओं की स्थापना भी प्रदेश के विभिन्न जनपदों में की जा रही है।

उन्होंने बताया कि लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊँची भव्य प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं, जो राष्ट्रवाद, सुशासन और लोकसेवा के आदर्शों का संदेश देती हैं। प्रयागराज में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा मैनपुरी में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएँ भी स्थापित की जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ की साढ़े बारह फीट ऊँची प्रतिमा गोरखपुर हवाई अड्डे पर स्थापित किए जाने हेतु तैयार है। सरदार वल्लभभाई पटेल की साढ़े बारह फीट ऊँची प्रतिमाएँ प्रतापगढ़ एवं मिर्जापुर में स्थापित की जाएँगी। मेरठ में अमर शहीद मंगल पांडेय, वाराणसी में संत कबीरदास एवं उनके पाँच प्रमुख शिष्यों, मैनपुरी में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं दानवीर भामाशाह, अयोध्या, चित्रकूट एवं मैनपुरी में महर्षि वाल्मीकि, तथा एटा, मैनपुरी, अलीगढ़, औरैया एवं सीतापुर में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबू कल्याण सिंह की छह फीट ऊँची प्रतिमाओं का निर्माण एवं स्थापना का कार्य कराया गया है अथवा प्रगति पर है। वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा बाँदा में स्थापित हो चुकी है तथा रायबरेली एवं आगरा में उनका निर्माण कार्य चल रहा है।

जयवीर सिंह ने बताया कि प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम में भगवान श्रीराम एवं निषादराज के ऐतिहासिक मिलन को दर्शाती 51 फीट ऊँची भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो भारतीय संस्कृति में सामाजिक समरसता, समानता और आत्मीयता के शाश्वत संदेश का प्रतीक होगी। बहराइच के चित्तौरा स्थित स्मारक परिसर में महाराजा सुहेलदेव की 40 फीट ऊँची अश्वारोही प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है। वाराणसी में संत गुरु रविदास की प्रतिमा तथा चित्रकूट में श्रीरामचरितमानस की रचना करते हुए गोस्वामी तुलसीदास की लगभग साढ़े बारह फीट ऊँची भव्य प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है। वहीं महाराजा सूरजमल की प्रतिमा आगरा के फतेहपुर सीकरी में स्थापित की जा रही है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल प्रतिमाओं की स्थापना करना नहीं, बल्कि उन महापुरुषों के विचारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों को समाज में स्थायी रूप से प्रतिष्ठित करना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है और भविष्य में भी महापुरुषों की स्मृतियों के संरक्षण तथा उनके आदर्शों के व्यापक प्रसार का यह अभियान पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, राष्ट्रनायकों, संत-महात्माओं एवं महान विभूतियों के सम्मान तथा उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में महापुरुषों की प्रतिमाओं की स्थापना का अभियान इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य केवल प्रतिमाओं का निर्माण कराना नहीं, बल्कि समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रभक्ति, त्याग, शौर्य, सामाजिक समरसता और लोकसेवा के आदर्शों से जोड़ना है।

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