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नवजात पोषण को मजबूत करने के लिए दिया एलएमयू प्रशिक्षण

नवजात पोषण को मजबूत करने के लिए दिया एलएमयू प्रशिक्षण

खनऊ। नवजात शिशुओं के पोषण एवं स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार की अभिनव पहल के तहत फैसिलिटी बेस्ड लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट,एलएमयू विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय छह दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केजीएमयू और यूनिसेफ के सहयोग से हुआ।
अपर मुख्य सचिव,चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित घोष ने कहा कि मां का दूध नवजात शिशु का पहला और सबसे अमूल्य अधिकार है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान की शुरुआत और पहले छह माह तक केवल मां का दूध ही शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव रखता है।
महानिदेशक,चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ.पवन कुमार अरुण ने कहा कि यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि नवजात मृत्यु दर और संक्रमण के जोखिम को कम करने तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम है।
केजीएमयू की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि 12 बेड वाले एसएनसीयू के साथ लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट ,एलएमयू स्थापित की जा रही है। इस यूनिट में प्रशिक्षित लैक्टेशन काउंसलर प्री-टर्म, कम वजन वाले या गंभीर रूप से बीमार नवजातों की माताओं को स्तनपान संबंधी सहायता प्रदान करेंगे। वे माताओं का दूध सुरक्षित रूप से निकालकर संग्रहित करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर शिशु को उपलब्ध कराएंगे।
उन्होंने बताया कि एसएनसीयू में भर्ती कम वजन या समय से पहले जन्मे नवजातों की माताओं को अब प्रशिक्षित स्टाफ और लैक्टेशन काउंसलर्स का सहयोग मिलेगा। ये काउंसलर्स माताओं को स्तनपान की सही पोजीशन, दूध निकालने, सुरक्षित भंडारण तथा ब्रेस्ट पंप के उपयोग, केवल स्तनपान के लाभ, माँ के पोषण आदि की जानकारी देंगे , जिससे नवजातों के पोषण और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि एलएमयू की गाइडलाइन केजीएमयू ने प्रदेश सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से तैयार की है, जिस पर यह चार दिवसीय प्रशिक्षण आधारित था।प्रशिक्षण का आयोजन दो-दो दिवसीय बैचों में किया गया, जिसमें प्रदेश के 45 जनपदों से आए 135 चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।
डॉ.शालिनी ने बताया कि इस मॉड्यूल के विकास में डॉ. एस. एन. सिंह ,केजीएमयू, डॉ. अनीता सिंह ,एसजीपीजीआई और डॉ. प्रतिमा आनंद ,लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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