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मिल गई कोरोना की दवा, पहली खेप में 4 करोड़ वैक्सीन बनाने पर काम शुरू

नई दिल्‍ली: कोरोना से जंग में विज्ञान की अपनी दिक्कते हैं। जैसे किसी भी क्लीनिकल ट्रायल में लगने वाला समय, लेकिन अब इस वक्त को कम करने के लिए सैंपल यानि वॉलेंटियर्स की संख्या को बढ़ाकर इस दिशा में काम हो रहा है। इसके लिए तैयार की जा रही है 10 हजार कोरोना कमांडो की सेना, जो मिलकर कोरोना का काम तमाम करेगी। जिनके शरीर में कोरोना के खिलाफ दवा से ऐसा बारुद बनेगा कि कोरोना का खौफ राख हो जाएगा।

ब्रिटेन से कोरोना के खात्मे की खबर कभी आ सकती है। साउथम्पटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने क्लीनिकल ट्रायल के लिए 10 हजार वॉलेंटियर्स की भर्ती शुरु कर दी है, जिनके शरीर पर दवा क इस्तेमाल का असर देखा जाएगा। इस साल की शुरुआत यानि जनवरी से इस वैक्सीन पर काम चल रहा है। अच्छी बात ये है कि शुरु से लेकर अब तक सब ठीक रहा है और चिंपाजी पर इस दवा ने बेहद अच्छा असर दिखाया है, जिसके बाद अब ह्यूमन ट्रायल शुरु होने जा रहा है। इस ट्रायल के वक्त को कम किया जा सके, इसलिए दस हजार से ज्यादा लोगों पर ये ट्रायल होगा।

अच्छी बात ये है कि पहले चरण के नतीजे बेहद अच्छे रहे हैं, जिसके बाद अब कोरोना से जंग में मंजिल नजर आ ने लगी है। वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास दिखाता है कि वो जल्द ही कामयाब हो सकते हैं। वैक्सीन पर जनवरी में काम शुरू हुआ, जिसमें चिम्पांजी से लिए गए वायरस का इस्तेमाल किया गया है और ये वही दवा है जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के जेनर इंस्टीट्यूट और ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है।

अगले चरण में बुजुर्गों, वयस्कों और बच्चों की जरुरत पड़ेगी। जिन पर बड़े पैमाने पर ये ट्रायल होंगे।

18-55 साल के 250 ऐसे लोग जो संक्रमितों के संपर्क में आए हों

120 ऐसे लोग जो 70 साल से ज्यादा उम्र के हों

कम से कम 55 साल की उम्र के 250 स्वस्थ लोगों का एक और ग्रुप

वैज्ञानिक अलग अलग उम्र के लोगों पर रिसर्च करना चाहते हैं ताकि हमारे शरीर की इम्यूनिटी पर होने वाले असर की जांच की जा सके। साथ ही बुजर्गों और बच्चों के शरीर में होने वाले अतंर के बारे में भी जाना जा सके और हर उम्र के लोगों के शरीर पर इसके साइड इफेक्ट की जानकारी मिल सके। ट्रायल के दूसरे और तीसरे राउंड में को ChAdOx1 या फिर वैक्सीन (MenACWY) की एक या दो खुराक दी जाएंगी। आप ये जानकर हैरान रह जांएगे की ChAdOx1 दवा एक चिम्पांजी के एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से बनी है। हालांकि जब ये मनुष्य के शरीर में जाएगी तो ये बीमारी नहीं दवा का काम करेगी। इसे उन जीनों के साथ जोड़ा जाएगा जो कोविड-19 वायरस से प्रोटीन बनाते हैं। मतलब जिन प्रोटीन के जरिए वायरस शरीर में अपना रास्ता बनाता है, उन्ही प्रोटीन से जाकर सीधे ये दवा जुड़ जाएगी।

वैज्ञानिकों ने इस दवा को लेकर इतना आत्मविश्वास दिखाया है कि इस दवा को बनाने का करार पहले ही हो चुका है और एस्ट्रजेनका जैसी प्रतिष्ठिक फार्मा कंपनी पहली खेप में इसकी 4 करोड़ वैक्सीन बनाने पर काम भी शुरु कर चुकी है।

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