Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story

चीन के परमाणु ठिकानों पर बड़ा खुलासा, मिसाइल साइलो निर्माण की आधिकारिक पुष्टि

The Bharatnow

The Bharatnow

Thursday, August 6, 2026

The Bharatnow

The Bharatnow

Search

चीन के परमाणु ठिकानों पर बड़ा खुलासा, मिसाइल साइलो निर्माण की आधिकारिक पुष्टि

August 5, 2026

Updated: August 5, 2026

ByTBN Desk

पेकिंग: चीन ने अपनी परमाणु रणनीति और सैन्य क्षमता को लेकर एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि उसने बड़े पैमाने पर भूमिगत परमाणु मिसाइल साइलो (मिसाइल लॉन्च पैड) का निर्माण किया है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के स्थापना दिवस के अवसर पर जारी की गई एक विशेष डॉक्यूमेंट्री में इस महत्वपूर्ण रणनीतिक विस्तार को सार्वजनिक किया गया। इस वृत्तचित्र में सैन्य इंजीनियरों ने इन नए मिसाइल ठिकानों को देश की सुरक्षा का 'अभूतपूर्व रक्षा कवच' करार देते हुए कहा कि साइलो के तेजी से निर्माण का सीधा मतलब है मिसाइलों की त्वरित तैनाती और युद्ध के लिए हर पल तैयार रहना।

अमेरिकी दावों पर चीन की आधिकारिक मुहर

यह नया मोड़ वर्षों से चल रहे उन पश्चिमी दावों की पुष्टि करता है जिन्हें अब तक बीजिंग द्वारा नजरअंदाज या खारिज किया जाता रहा है। 2021 के आसपास अमेरिका के रक्षा मुख्यालय पेंटागन और कई शीर्ष वैश्विक थिंक टैंकों ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर चीन के उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों में सैकड़ों मिसाइल साइलो बनाए जाने का दावा किया था। अमेरिकी रिपोर्ट्स के अनुसार शिनजियांग के हामी, गांसू के यूमेन और इनर मंगोलिया में करीब 300 से अधिक साइलो तैयार किए जा चुके हैं। पूर्व में चीन ने इन निर्माण कार्यों को विंड फार्म यानी पवन ऊर्जा परियोजनाएं बताकर टालने का प्रयास किया था, लेकिन इस नई डॉक्यूमेंट्री ने सभी पुरानी अटकलों को खत्म कर दिया है।

डीएफ-5सी मिसाइलों की संभावित तैनाती

यद्यपि चीन की सैन्य रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन भूमिगत खानों में किस श्रेणी के हथियार रखे जाएंगे, परंतु वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन्हें विशेष रूप से 'डीएफ-5सी' जैसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए डिजाइन किया गया है। यह अत्यधिक शक्तिशाली मिसाइल प्रणाली दुनिया के किसी भी कोने तक हमला करने की क्षमता रखती है और इसे केवल ऐसे गहरे साइलो से ही संचालित किया जा सकता है।

रणनीतिक संतुलन और पड़ोसी देशों पर असर

चीन का दावा है कि ये नए भूमिगत ठिकाने किसी भी तरह के दुश्मन हमले को सहने और तुरंत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हैं, जो उसकी 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले परमाणु हथियार न चलाने की नीति को मजबूती प्रदान करते हैं। हालांकि, इन नए ठिकानों का भौगोलिक दायरा भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिनजियांग और गांसू के ये ठिकाने भारतीय सीमाओं से कुछ ही हजार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। वैश्विक सुरक्षा विश्लेषक इस घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय पटल पर रणनीतिक संतुलन के बदलाव और एक नई परमाणु होड़ के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

अमेरिकी दावों पर चीन की आधिकारिक मुहर

डीएफ-5सी मिसाइलों की संभावित तैनाती

रणनीतिक संतुलन और पड़ोसी देशों पर असर

  • Tags

The Bharatnow

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: The Bharat Now