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Thursday, July 9, 2026
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चीन की बढ़ती ताकत के बीच भारत-इंडोनेशिया साथ, सवांग पोर्ट के विकास की तैयारी
July 9, 2026
Updated:July 9, 2026
ByTBN Desk
जकार्ता: भारत और इंडोनेशिया ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और सैन्य साझेदारी को एक नई ऊंचाई देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगाई है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों को संतुलित करना और भारत के विकास-उन्मुख दृष्टिकोण को मजबूती से आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच इंडोनेशिया के सबसे महत्वपूर्ण 'सवांग बंदरगाह' (Sabang Port) के संयुक्त विकास को लेकर एक ऐतिहासिक सहमति बनी है। यह बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शुमार 'मलक्का जलडमरूमध्य' (Strait of Malacca) के ठीक मुहाने पर स्थित है।
विस्तारवाद नहीं, विकासवाद के पक्ष में भारत
इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत कभी भी विस्तारवाद की नीति का समर्थन नहीं करता, बल्कि वह हमेशा 'विकासवाद' और 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर आगे बढ़ता है। पीएम मोदी ने दोनों देशों के भौगोलिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्र में हमारे बीच की दूरी महज 150 किलोमीटर है। यह दूरी कोई बाधा नहीं, बल्कि दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों का एक मजबूत सेतु है।
मलक्का जलडमरूमध्य और सवांग बंदरगाह का रणनीतिक महत्व
सवांग बंदरगाह का संयुक्त विकास भारत की सुरक्षा और नौसैनिक पहुंच के लिहाज से बेहद गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह स्थान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अंतिम छोर 'इंदिरा पॉइंट' से महज 100 मील की दूरी पर स्थित है, जो भारत के महत्वाकांक्षी 'ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट' के बेहद करीब है। मलक्का जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार की एक लाइफलाइन है, जहां से हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर का माल गुजरता है। पश्चिमी एशिया से पूर्वी एशियाई देशों (चीन, जापान, दक्षिण कोरिया) को होने वाली कच्चे तेल और गैस की अधिकांश आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। इसके अलावा भारत का खुद का पेट्रोलियम, कोयला और मशीनरी का एक बड़ा व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सौदों से मजबूत होगी नाकेबंदी
इस महत्वपूर्ण बंदरगाह के विकास के जरिए भारत और इंडोनेशिया मिलकर हिंद महासागर में चीन की आक्रामक समुद्री रणनीतियों (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स) को कड़ी चुनौती देने में सक्षम होंगे। रणनीतिक सहयोग के अलावा, दोनों देशों के बीच पहले ही ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र मिसाइल जैसी घातक रक्षा प्रणालियों के लिए रक्षा सौदे हो चुके हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) के तहत उठाया गया यह कदम न केवल दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई धार देगा, बल्कि एक स्वतंत्र, मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
विस्तारवाद नहीं, विकासवाद के पक्ष में भारत
मलक्का जलडमरूमध्य और सवांग बंदरगाह का रणनीतिक महत्व
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सौदों से मजबूत होगी नाकेबंदी
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