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नहीं रहे पूर्व आर्मी चीफ जनरल विश्वनाथ शर्मा, श्रीलंका ऑपरेशन में निभाई थी अहम भूमिका
July 31, 2026
Updated:July 31, 2026
ByTBN Desk
नई दिल्ली| भारतीय सेना के पूर्व सेना प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा का शुक्रवार को 96 वर्ष की आयु में प्राकृतिक कारणों से नई दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश और सैन्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
सैन्य करियर और ऐतिहासिक उपलब्धियां
वर्ष 1950 में 16वीं लाइट कैवेलरी में कमीशन प्राप्त करने वाले जनरल विश्वनाथ शर्मा स्वतंत्रता के बाद सेना में कमीशन पाने वाले पहले ऐसे अधिकारी थे, जिन्होंने देश के सर्वोच्च सैन्य पद यानी 'सेना प्रमुख' तक का सफर तय किया। उन्होंने 1 मई 1988 से लेकर 30 जून 1990 तक भारतीय सेना के 14वें प्रमुख के रूप में अपनी विशिष्ट सेवाएं दीं।
1965 और 1971 के युद्धों में योगदान: एक मेजर के रूप में उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान लाहौर सेक्टर में डटकर मुकाबला किया था। इसके बाद उन्होंने 66 आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली और प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (वेलिंगटन) में बतौर इंस्ट्रक्टर भी अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 1971 के ऐतिहासिक युद्ध के दौरान उन्होंने एक आर्मर्ड डिवीजन के कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशन्स) के रूप में अहम भूमिका निभाई।
रणनीतिक कमान: अपने लंबे और गौरवशाली करियर के दौरान उन्होंने उग्रवाद प्रभावित संवेदनशील इलाकों में माउंटेन ब्रिगेड, राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड ब्रिगेड और पूर्वी सेक्टर में माउंटेन डिवीजन का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।
अहम भूमिका और विशिष्ट सम्मान
पूर्वी सेना कमांडर के रूप में उनका कार्यकाल अरुणाचल प्रदेश के सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील सुमदोरोंग चू घाटी में चीन के साथ हुए 1987 के सैन्य गतिरोध के समय का था, जिसमें उन्होंने अपनी असाधारण रणनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया था। देश के लिए उनकी अनूठी और निष्ठावान सेवाओं को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' और बाद में 'परम विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया था। भारतीय सैन्य इतिहास में उनका योगदान हमेशा स्वर्ण अक्षरों में याद रखा जाएगा।
सैन्य करियर और ऐतिहासिक उपलब्धियां
अहम भूमिका और विशिष्ट सम्मान
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