Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story

UPI पेमेंट पर लग सकता है मर्चेंट चार्ज, जानें आम ग्राहकों पर क्या होगा असर

The Bharatnow

The Bharatnow

Thursday, August 6, 2026

The Bharatnow

The Bharatnow

Search

UPI पेमेंट पर लग सकता है मर्चेंट चार्ज, जानें आम ग्राहकों पर क्या होगा असर

August 5, 2026

Updated: August 5, 2026

ByTBN Desk

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। यह विधेयक सरकार को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क निर्धारित करने और लगाने का वैधानिक अधिकार प्रदान करेगा। जनवरी 2020 में सरकार द्वारा यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर एमडीआर को शून्य कर दिया गया था, लेकिन अब इस संशोधन के बाद बड़े यूपीआई लेनदेन पर एक बार फिर मर्चेंट शुल्क लागू होने की संभावना बढ़ गई है।

कानून में बदलाव और एमडीआर शुल्क का स्वरूप

प्रस्तावित कानून वर्तमान धारा 10ए के तहत दी गई पूर्ण वैधानिक छूट को समाप्त कर देगा, जिससे केंद्र सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह समय-समय पर यह अधिसूचित करे कि किन भुगतानों पर शून्य एमडीआर रहेगा और किन पर शुल्क लगेगा। एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल लेनदेन को प्रोसेस करने के बदले बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को चुकाते हैं। वर्तमान में क्रेडिट कार्ड पर करीब 1.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर 0.9 प्रतिशत तक एमडीआर लगता है, जबकि यूपीआई लेनदेन फिलहाल व्यापारियों के लिए पूरी तरह मुफ्त है।

बुनियादी ढांचा मजबूत करने और निवेश बढ़ाने का तर्क

देश में डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के बीच अकेले जुलाई माह में 29.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 23.6 अरब यूपीआई लेनदेन प्रोसेस किए गए। फोनपे और गूगल पे जैसी प्रमुख फिनटेक कंपनियां इस नेटवर्क में बड़ा हिस्सा रखती हैं। फिनटेक उद्योग लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि शून्य एमडीआर के कारण डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बनाए रखना और नए तकनीकी निवेश करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि कंपनियों को इन लेनदेन से कोई प्रत्यक्ष आय नहीं हो पा रही थी।

बड़े व्यापारियों और उच्च मूल्य के भुगतानों पर लगेगा शुल्क

सूत्रों के मुताबिक आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई भुगतान पूरी तरह मुफ्त ही रखा जाएगा। सरकार केवल बड़े स्तर के व्यावसायिक लेनदेन पर शुल्क लगाने की योजना बना रही है, जिसके तहत 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.3 से 0.5 फीसदी तक एमडीआर लगाया जा सकता है। वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि इस कदम से डिजिटल भुगतान उद्योग को लगभग 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।

कानून में बदलाव और एमडीआर शुल्क का स्वरूप

बुनियादी ढांचा मजबूत करने और निवेश बढ़ाने का तर्क

  • Tags

The Bharatnow

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: The Bharat Now