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बंगाल में 2400 CAPF कंपनियों का पहरा: ममता बोलीं मैं बस नाम की सीएम

बंगाल में 2400 CAPF कंपनियों का पहरा: ममता बोलीं मैं बस नाम की सीएम

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद होने वाली संभावित हिंसा को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। आयोग ने राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुल 2400 सीएपीएफ (CAPF) कंपनियों की तैनाती का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

मतदान संपन्न होने के बाद भी सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जाएगी, बल्कि 29 अप्रैल के बाद 200 अतिरिक्त कंपनियों को विशेष रूप से ईवीएम (EVM) और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में लगाया जाएगा। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस समय पश्चिम बंगाल का प्रशासनिक नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था उनके हाथों में नहीं है, बल्कि पूरी कमान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के पास है।

EVM और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए 'लोहे का घेरा'

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के बाद का समय बेहद संवेदनशील होता है। इसीलिए 29 अप्रैल के बाद सुरक्षा बलों की 200 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है। इन कंपनियों का मुख्य काम स्ट्रॉन्ग रूम की चौबीसों घंटे निगरानी करना और चुनाव बाद होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोकना होगा। बंगाल के चुनावी इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी तादाद में केंद्रीय बलों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है। आयोग का मकसद केवल निष्पक्ष मतदान ही नहीं, बल्कि नतीजों तक शांति बनाए रखना भी है।

ममता का आरोप: 'गृहमंत्री और आयोग चला रहे हैं बंगाल'

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हर छोटी-बड़ी चीज को मॉनिटर कर रहा है और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके कई अनुभवी अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है, जिससे प्रशासन का तालमेल पूरी तरह से टूट चुका है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि जब कानून-व्यवस्था और पुलिस उनके नियंत्रण में ही नहीं है, तो किसी भी गड़बड़ी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

मालदा की घटना और सूचना तंत्र पर सवाल

ममता बनर्जी ने मंगलवार को मालदा में हुई हिंसक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्हें यह तक नहीं पता कि मालदा में क्या हुआ, इसके पीछे कौन लोग थे और हालात कैसे बिगड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और उनके बीच की सूचना की कड़ी को जानबूझकर काट दिया गया है। ममता ने सवाल उठाया कि अगर मुख्यमंत्री को ही राज्य की घटनाओं की जानकारी नहीं मिलेगी, तो व्यवस्था कैसे चलेगी? यह बयान सीधे तौर पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा हमला माना जा रहा है।

विपक्ष और आयोग का अपना तर्क

वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना है कि बंगाल में निष्पक्ष चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती बेहद जरूरी थी। चुनाव आयोग का मानना है कि पिछले अनुभवों को देखते हुए सुरक्षा का यह स्तर अनिवार्य है ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। 2400 कंपनियों की तैनाती यह दर्शाती है कि आयोग बंगाल चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। अब देखना यह होगा कि सुरक्षा के इन कड़े इंतजामों के बीच चुनावी नतीजे राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

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