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बद्रीनाथ धाम अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय का वर्चस्व, कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के निर्देशन में गई अनुप्रयुक्त दर्शनशास्त्र विभाग की टीम ने लहराया परचम

बद्रीनाथ धाम अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय का वर्चस्व, कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के निर्देशन में गई अनुप्रयुक्त दर्शनशास्त्र विभाग की टीम ने लहराया परचम

रेली,18मई। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के एक उच्च स्तरीय दल ने उत्तराखंड के पावन धाम बद्रीनाथ में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में प्रतिभाग कर वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।

13 मई 2026 से 15 मई 2026 तक चले इस उच्च स्तरीय दार्शनिक महाकुंभ में रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय की टीम ने अपनी उत्कृष्ट विद्वत्ता का लोहा मनवाया। इस तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय समागम में दुनिया भर से लगभग 450 शोध छात्र/छात्राएं, असिस्टेंट प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स और प्रोफेसर्स सम्मिलित हुए, जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रत्यक्ष चैतन्य शंकराचार्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी जी महाराज एवं पूज्य योगी बालक नाथ जी महाराज सहित दर्शन जगत के कई मूर्धन्य विद्वान और संत समाज उपस्थित रहे।
अधिवेशन के अत्यंत महत्वपूर्ण और तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय परिसर के अनुप्रयुक्त दर्शनशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं चीफ वार्डन प्रोफेसर ए.के. सिंह ने 'सत्राध्यक्ष' की गरिमामयी भूमिका का निर्वहन किया। उनके कुशल संचालन में देश-विदेश से आए अनेक विद्वानों और शोधार्थियों के शोधपत्रों का सफल वाचन संपन्न हुआ। दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में उनके इस अतुलनीय और विशिष्ट योगदान के लिए प्रत्यक्ष चैतन्य शंकराचार्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी जी महाराज ने अपने कर-कमलों से प्रोफेसर ए.के. सिंह को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया।
कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के नेतृत्व में गए इस दल में शामिल अनुप्रयुक्त दर्शनशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रियांशु अग्रवाल, टीचिंग असिस्टेंट हिंमाशु जायसवाल और हिमांशी बहेरा तथा शोध छात्र प्रखर शर्मा ने भी सेमिनार में सक्रिय प्रतिभाग किया। इन युवा आचार्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों को वैश्विक मंच पर उपस्थित विद्वानों द्वारा मुक्तकंठ से सराहा गया। दर्शन के क्षेत्र में इसी प्रकार निरंतर उत्कृष्ट शोधपरक योगदान देने हेतु इन आचार्यों को भी मंच पर सम्मानित और प्रोत्साहित किया गया। विद्वानों के अनुसार, बद्रीनाथ धाम की पावन धरा पर आयोजित इस अधिवेशन ने दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में एक नया और विशिष्ट प्रतिमान स्थापित किया है।
विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त दर्शनशास्त्र विभाग की इस ऐतिहासिक और वैश्विक उपलब्धि पर कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह ने गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए पूरी टीम को विशेष रूप से धन्यवाद दिया और बधाई दी। कुलपति जी ने अपने संदेश में कहा कि विश्वविद्यालय के आचार्यों और शोधार्थियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस प्रकार का उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के अकादमिक और दार्शनिक आयोजनों में विश्वविद्यालय की सहभागिता को निरंतर बढ़ावा देने की बात कही।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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