अगर आप भी सिगरेट के शौकीन हैं, तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। मई की शुरुआत से सिगरेट पीना अब पहले जैसा सस्ता नहीं रहेगा। सिगरेट बनाने वाली कंपनियां कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर सकती है।
सिगरेट की कीमत में 17% तक बढ़ोतरी
29 अप्रैल को शेयर बाजार में सिगरेट कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी देखी गई है। इस तेजी के पीछे का कारण भी सामने आया है। देश की दिग्गज सिगरेट कंपनियां जैसे ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स मई 2026 से सिगरेट की कीमतों में लगभग 17% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
जानकारी के अनुसार यह बढ़ोतरी केवल प्रीमियम सिगरेट ब्रांड्स तक ही सीमित नहीं रहेगी। कंपनियां अपने सस्ते ब्रांड्स की कीमतों में भी इजाफा करने की योजना बना रही हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं सिगरेट के दाम?
सिगरेट की कीमतों में होने वाली इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण टैक्स के ढांचे में हुआ बदलाव है। साल 2025 की शुरुआत में संसद द्वारा केंद्रीय उत्पाद शुल्क बिल पास किया गया था। इस बिल के कानून बनने के बाद सिगरेट कंपनियों पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ गया है।
वर्तमान में सिगरेट पर लगने वाले टैक्स का गणित कुछ इस प्रकार है
- सिगरेट पर 40% की दर से जीएसटी लगता है।
- इसके अलावा अब प्रति एक हजार सिगरेट स्टिक्स पर दो हजार से लेकर आठ हजार 500 रुपए तक की एक्साइज ड्यूटी चुकानी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए टैक्स ढांचे की वजह से 75-85 mm वाली सिगरेट की कुल लागत में 22% से 28% तक का इजाफा हो चुका है। इसी बढ़ी हुई लागत का बोझ अब कंपनियां ग्राहकों पर डालने की तैयारी में हैं।
क्या होंगे नए रेट्स?
जानकारी के अनुसार कंपनियां कीमतों में औसतन 15% से 17% तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो, ITC गोल्डफ्लेक प्रीमियम का पैकेट वर्तमान में लगभग 115 रुपए में मिलता है, उसकी कीमत बढ़कर 135 रुपए तक पहुंच सकती है।
इसी तरह अन्य प्रीमियम ब्रांड्स की कीमतों में भी भारी उछाल आएगा। यह केवल महंगे ब्रांड्स तक ही सीमित नहीं होगा। कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने सस्ते ब्रांड्स की कीमतों में भी इजाफा करेंगी ताकि बढ़े हुए एक्साइज ड्यूटी के बोझ को संतुलित किया जा सके।

शेयर बाजार और FMCG इंडेक्स का हाल
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी होने से शुरुआत में बिक्र पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन सिगरेट कंपनियों के पास एक प्राइसिंग (FMCG MRP Update) पावर होती है।
इससे वे दाम बढ़ाकर अपना मुनाफा बरकरार रख सकती हैं। आसान भाषा में कहें तो सिगरेट की मांग अक्सर बनी रहती है, चाहे कीमतें थोड़ी बढ़ ही क्यों न जाएं।
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