Dailyhunt
10 अप्रैल का इतिहास: World Homeopathy Day, क्या मीठी गोलियों में वाकई छिपा है इलाज का राज

10 अप्रैल का इतिहास: World Homeopathy Day, क्या मीठी गोलियों में वाकई छिपा है इलाज का राज

ज के दिन की कहानी: हर साल 10 अप्रैल को पूरी दुनिया विश्व होम्योपैथी दिवस मनाती है। यह दिन इस चिकित्सा के जनक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन को समर्पित है। आज के समय में जब एलोपैथी का बोलबाला है, होम्योपैथी अपनी जगह बनाए हुए है।

बहुत से लोग इसे जादुई मीठी गोलियां कहते हैं। 10 अप्रैल को उनका जन्मदिन मनाया जाता है। वहीं कुछ लोग इसके वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठाते हैं। क्या ये गोलियां वाकई असर करती हैं? क्या य केवल मन का वहम है?

आइए इस मीठे सफर की गहराई जानते हैं। ये इलाज का एक अनोखा तरीका है। इसमें कड़वाहट नहीं बल्कि सेहत का जादू है। चलिए, इस ऐतिहासिक कहानी को विस्तार से समझते हैं।

जर्मनी से शुरू हुआ एक क्रांतिकारी सफर

होम्योपैथी की शुरुआत 18वीं सदी के अंत में जर्मनी में हुई थी। डॉ. सैमुअल हैनीमैन उस समय की मेडिकल प्रैक्टिसेज से परेशान थे। उस दौर में मरीजों का खून निकालकर इलाज किया जाता था।

हैनीमैन ने एक सुरक्षित और सरल रास्ता खोजने की ठानी। उन्होंने खुद पर सिनकोना की छाल का प्रयोग करके देखा। उन्होंने पाया कि स्वस्थ शरीर में दवा बीमारी जैसे लक्षण पैदा करती है। यहीं से सिमिलिया सिमिलिबस क्योरेंटुर का सिद्धांत जन्म ले चुका था।

इसका सीधा मतलब है कि लोहा ही लोहे को काटता है। उन्होंने दवाओं को बहुत पतला करके देना शुरू किया। उनका मानना था कि दवा जितनी पतली होगी, उतनी असरदार होगी। देखते ही देखते यह पद्धति पूरे यूरोप में मशहूर हो गई। भारत में ये 19वीं सदी के मध्य में काफी लोकप्रिय हुई।

एलोपैथी से कितनी अलग है होम्योपैथी

एलोपैथी मुख्य रूप से बीमारी के लक्षणों पर प्रहार करती है। ये तुरंत आराम देने के लिए केमिकल दवाओं का यूज करती है। दूसरी तरफ, होम्योपैथी मरीज की मानसिक और शारीरिक स्थिति देखती है। ये बीमारी को जड़ से खत्म करने का दावा करती है।

इसमें मरीज की पूरी लाइफस्टाइल और आदतों का अध्ययन होता है। होम्योपैथी में दवाएं नेचुरल सोर्सेज जैसे पौधों और खनिजों से बनती हैं। एलोपैथी में अक्सर दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट्स देखे जाते हैं। होम्योपैथी का दावा है कि इसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता।

हालांकि, एलोपैथी इमरजेंसी सिचुएशन में बहुत तेजी से काम करती है। होम्योपैथी को धीमे इलाज के तौर पर जाना जाता है। क्रॉनिक बीमारियों में लोग अक्सर होम्योपैथी पर ही भरोसा करते हैं। दोनों मेथड्स का अपना अलग महत्व और काम करने का तरीका है।

क्या होम्योपैथी वाकई बीमारी को ठीक करती है

इस सवाल पर विज्ञान और विश्वास के बीच जंग है। बहुत से मरीज दावा करते हैं कि वे पूरी तरह ठीक हुए। त्वचा रोग और एलर्जी में इसके परिणाम काफी अच्छे मिलते हैं। गठिया और साइनस जैसी समस्याओं में भी लोग इसे चुनते हैं।

लेकिन मॉडर्न साइंस इसे अक्सर प्लेसबो इफेक्ट कहता है। यानी मरीज को लगता है कि वह ठीक हो रहा है। साइंटिफिक रीजनिंग देते हैं कि गोलियों में दवा की मात्रा नेग्लिजिब्ल है। लेकिन इसके बावजूद लाखों लोग इस पर अटूट विश्वास रखते हैं।

कई मामलों में बिना किसी नुकसान के मरीज स्वस्थ हुए हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में इसे सहायक उपचार माना जाता है। यह मरीज की इम्युनिटी को बढ़ाती है। सही डॉक्टर की सलाह से ये मेथड बहुत लाभकारी है।

इसके कुछ कड़वे सच

होम्योपैथी के अपने फायदे हैं तो कुछ सीमाएं भी हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका असर धीमा होता है। हार्ट अटैक या एक्सीडेंट में ये मेथड काम नहीं आती। वहां आपको एलोपैथी और सर्जरी की ही जरूरत पड़ती है।

कई बार लोग गंभीर बीमारी में सिर्फ मीठी गोलियां खाते हैं। यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है। दवाओं को धूप और तेज गंध से बचाकर रखना पड़ता है। इलाज के दौरान प्याज और लहसुन जैसी चीजें मना होती हैं।

आपको डॉक्टर द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना होता है। सही समय पर सही खुराक लेना सबसे ज्यादा जरूरी है। खुद से दवा लेना यानी सेल्फ-मेडिकेशन हमेशा खतरनाक होता है। हमेशा रजिस्टर्ड होम्योपैथिक डॉक्टर (BHMS) से ही सलाह लेनी चाहिए।

भारत में कब से शुरु हुआ होम्योपैथी

भारत में होम्योपैथी (होम्योपैथी डॉक्टर्स) करीब 185 साल पहले आई। आज भारत होम्योपैथी का सबसे बड़ा हब है। यहां करोड़ों लोग इन मीठी गोलियों पर भरोसा करते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 10% आबादी इसे चुनती है।

लोग इसे सुरक्षित और असरदार विकल्प मानते हैं। करीब 2 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड डॉक्टर यहां हैं। गांवों से लेकर शहरों तक इसका बड़ा नेटवर्क है। एलोपैथी के बाद यह सबसे पसंदीदा इलाज है। लोग बिना साइड इफेक्ट के ठीक होना चाहते हैं।

इसलिए इस पर भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व होम्योपैथी दिवस हमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करता है। यह याद दिलाता है कि इलाज सिर्फ रसायनों में नहीं है। शरीर की आंतरिक शक्ति को जगाना ही असली उपचार है। डॉ. हैनीमैन का यह तोहफा आज करोड़ों लोगों का सहारा है।

Reference Links

  1. Central Council for Research in Homoeopathy (CCRH)

  2. Ministry of AYUSH, Government of India, world homeopathy day

  3. World Health Organization (Traditional Medicine)

  4. National Center for Homeopathy (USA)

10 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास में हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 10 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 10 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-

विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1710: दुनिया का पहला कॉपीराइट कानून ग्रेट ब्रिटेन में आज ही लागू हुआ था।

  • 1790: संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी पहली पेटेंट प्रणाली की स्थापना की थी।

  • 1815: इंडोनेशिया के माउंट तम्बोरा में इतिहास का सबसे भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट हुआ।

  • 1825: दुनिया के खूबसूरत पर्यटन स्थल हवाई में पहला होटल खोला गया था।

  • 1858: लंदन के वेस्टमिंस्टर टॉवर की मशहूर घंटी 'बिग बेन' बनकर तैयार हुई।

  • 1869: अमेरिकी कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 9 की।

  • 1925: मशहूर उपन्यास 'द ग्रेट गैट्सबी' का पहला प्रकाशन आज ही हुआ था।

  • 1939: इटली की सेनाओं ने अल्बानिया पर हमला करके वहां कब्जा कर लिया था।

  • 1959: जापानी राजकुमार अकिहितो ने एक आम नागरिक मिचिको से शादी रचाई थी।

  • 1963: अमेरिकी पनडुब्बी थ्रेशर के डूबने से 119 नाविकों की दर्दनाक मौत हुई।

  • 1970: पॉल मेकार्टनी ने मशहूर बैंड 'बीटल्स' से अलग होने की घोषणा की थी।

  • 1973: पाकिस्तान ने अपने पुराने संविधान को पूरी तरह से निरस्त कर दिया था।

  • 1988: जापान में दुनिया का मशहूर 'महान सेटो ब्रिज' यातायात के लिए खुला।

  • 2010: पोलैंड के राष्ट्रपति का विमान क्रैश हुआ जिसमें 96 लोगों की मौत हुई।

  • 2012: एप्पल (Apple) दुनिया की 600 बिलियन डॉलर वाली सबसे बड़ी कंपनी बनी।

भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1802: मद्रास के पास से भारत का महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण शुरू हुआ था।

  • 1875: स्वामी दयानंद सरस्वती ने मुंबई में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी।

  • 1889: राम चंद्र चटर्जी गर्म गुब्बारे में उड़ान भरने वाले पहले भारतीय बने।

  • 1982: भारत के बहुउद्देशीय उपग्रह इनसेट-1ए (INSAT-1A) का सफल प्रक्षेपण हुआ था।

  • 1995: भारत के छठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का आज ही निधन हुआ था।

  • 1999: भारत और पाकिस्तान ने मिलकर चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स का गठन किया था।

  • 2000: गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में पाकिस्तान को निकालने का भारत का प्रस्ताव मंजूर हुआ।

  • 2001: भारत और ईरान के बीच महत्वपूर्ण 'तेहरान घोषणा-पत्र' पर हस्ताक्षर हुए।

  • 2016: केरल के पुत्तिलिंग मंदिर में आग से 110 लोगों की मौत हुई थी।

आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...

12 जनवरी का इतिहास: National Youth Day, जानें विवेकानंद का भारतीय दर्शन

11 जनवरी का इतिहास: ताशकंद में क्या हुआ था, पढ़ें शास्त्री जी के निधन की कहानी

आज का इतिहास: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जानें उनके वल्लभ से सरदार बनने तक का सफर

आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: d sutr