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1266 करोड़ बैंक फ्रॉड में ED की कार्रवाई, श्रीकांत भसी की 3.66 करोड़ की पॉलिसी जब्त

1266 करोड़ बैंक फ्रॉड में ED की कार्रवाई, श्रीकांत भसी की 3.66 करोड़ की पॉलिसी जब्त

    समझें क्या है पूरा मामला

    • ED ने श्रीकांत भसी की दो विदेशी बीमा पॉलिसी जब्त कर लीं।
    • इन पॉलिसी की कीमत करीब 3.66 करोड़ रुपए है।
    • यह मामला SBI के साथ हुई 1266 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी से जुड़ा है।
    • भसी एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के प्रमोटर हैं।
    • भसी ने अप्रैल में पॉलिसी सरेंडर करने की कोशिश की थी।

    बड़ी कार्रवाई की वजह

    प्रवर्तन निदेशालय यानी ED (Enforcement Directorate) के भोपाल जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने श्रीकांत भसी की दो विदेशी निवेश से जुड़ी बीमा पॉलिसी जब्त कर ली हैं। इन दोनों पॉलिसी की कुल कीमत करीब 3.66 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह रकम अमेरिकी डॉलर में 3 लाख 87 हजार 814.42 डॉलर के बराबर है। दोनों पॉलिसी ज्यूरिख इंटरनेशनल लाइफ लिमिटेड कंपनी के पास रखी गई थीं। ED ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA (Prevention of Money Laundering Act) 2002 के तहत की है। एजेंसी ने इसके लिए PMLA की धारा 5(1) का इस्तेमाल किया है।

    कौन हैं श्रीकांत भसी

    श्रीकांत भसी एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड यानी AOPL (Advantage Overseas Private Limited) कंपनी के प्रमोटर हैं। यह कंपनी भोपाल से जुड़ी हुई है। ED की जांच इसी कंपनी और भसी के खिलाफ चल रही है। जांच की शुरुआत सीबीआई यानी CBI (Central Bureau of Investigation) की एक FIR से हुई थी। यह FIR सीबीआई के बैंकिंग सिक्योरिटी एंड फ्रॉड सेल यानी BSFB ने दर्ज की थी। FIR में कंपनी के डायरेक्टर और कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    क्या है पूरा फ्रॉड

    आरोप है कि AOPL और उसके प्रमोटरों ने फर्जी तरीकों से भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI (State Bank of India) को 1266.63 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया। यह नुकसान फर्जी मर्चेंटिंग ट्रेड लेनदेन के जरिए किया गया। ED की जांच में सामने आया कि कंपनी ने नकली ट्रेड डील्स और सर्कुलर ट्रेडिंग का सहारा लिया। कंपनी ने फर्जी ट्रेड दस्तावेज भी तैयार किए। इन दस्तावेजों के दम पर बैंक से कर्ज सुविधाएं हासिल की गईं। इसके बाद बैंक का पैसा कई घरेलू और विदेशी कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया।

    जानकारों के मुताबिक इस तरह की मर्चेंटिंग ट्रेड डील्स में असली माल की खरीद बिक्री नहीं होती। सिर्फ कागजों पर लेनदेन दिखाकर बैंक से पैसा निकाला जाता है। SBI को यह नुकसान साल 2018 में अप्रैल और मई के बीच हुआ था। यह नुकसान 12 फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट यानी FLC (Foreign Letter of Credit) से जुड़ा था। इन सभी FLC की कुल कीमत करीब 200 मिलियन डॉलर थी। यह रकम भारतीय करेंसी में 1266.63 करोड़ रुपए के बराबर बैठती है। ED के मुताबिक AOPL समय पर जरूरी मार्जिन राशि जमा नहीं कर पाई। इस वजह से सभी FLC फेल हो गए और पूरा बोझ SBI पर आ गया।

    पॉलिसी सरेंडर करने की कोशिश क्यों फेल हुई

    ED की जांच में एक अहम बात सामने आई। अप्रैल 2026 में श्रीकांत भसी ने दोनों बीमा पॉलिसी सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने पॉलिसी से मिलने वाली रकम अपने भारतीय बैंक खाते में मंगाने की कोशिश की। ED को आशंका थी कि अगर पॉलिसी सरेंडर हो गई तो यह रकम कहीं और गायब हो सकती है। इसी वजह से एजेंसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों पॉलिसी अटैच कर लीं। ED का कहना है कि यह कदम अपराध से कमाई गई रकम को बचाने के मकसद से उठाया गया।

    पहले भी हो चुकी हैं बड़ी जब्तियां

    यह कोई पहला मामला नहीं है जब ED ने इस केस में संपत्ति जब्त की हो। एजेंसी इससे पहले भी कई बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। नवंबर 2025 में ED ने दुबई में नौ लग्जरी प्रॉपर्टी जब्त की थीं। इन प्रॉपर्टी की कीमत करीब 51.70 करोड़ रुपए आंकी गई थी। यह सभी प्रॉपर्टी श्रीकांत भसी की थीं। बाद में पता चला कि भसी ने यह प्रॉपर्टी अपनी बेटी को गिफ्ट कर दी थीं। ED का मानना है कि यह गिफ्ट सिर्फ पैसों का असली स्रोत छिपाने के लिए किया गया था। इसके अलावा एजेंसी ने भारत में भी करीब 111 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की हुई है।

    ED क्या कह रही है

    ED ने साफ कहा है कि जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि वह अपराध से कमाई गई पूरी रकम का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए घरेलू और विदेशी दोनों स्तर पर लेनदेन की जांच हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में और संपत्तियां भी अटैच हो सकती हैं। ED यह भी देख रही है कि भसी और उनकी कंपनी से जुड़े और कौन से लोग शामिल हो सकते हैं।

    मामले में आगे क्या

    PMLA के तहत अटैचमेंट के बाद यह मामला अब आगे की कानूनी प्रक्रिया से गुजरेगा। प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब यह नहीं है कि दोषी साबित हो गया है। कानूनी प्रक्रिया में दोष सिद्ध होना अभी बाकी है। एजेंसी इस केस से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस केस में और जानकारी सामने आ सकती है।

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