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27 अप्रैल का इतिहास: जब बाबर की तोपों ने बदला दिल्ली का नसीब और भारत का भूगोल

27 अप्रैल का इतिहास: जब बाबर की तोपों ने बदला दिल्ली का नसीब और भारत का भूगोल

ज के दिन की कहानी: मान लीजिए कि धूल भरी आंधी के बीच हजारों घोड़ों की टापें गूंज रही हैं। एक तरफ इब्राहिम लोदी की विशाल सेना और विशालकाय हाथी खड़े थे। दूसरी तरफ मध्य एशिया से आया एक योद्धा बाबर अपनी किस्मत आजमा रहा था।

साल 1526 की वह सुबह भारत का इतिहास हमेशा के लिए बदलने वाली थी। बाबर के पास सेना कम थी लेकिन इरादे और बारूद बहुत ज्यादा थे। पानीपत के मैदान में बारूद के धमाकों ने लोदी साम्राज्य की नींव हिला दी। इस जीत ने दिल्ली के तख्तो-ताज का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया था।

दिल्ली का तख्तो-ताज और बाबर का राज्याभिषेक

पानीपत की जीत के बाद बाबर ने सीधे दिल्ली की ओर कूच किया। 24 अप्रैल और उसके आसपास के दिनों में सत्ता का ट्रांसफर हुआ। उसने दिल्ली पहुंचकर वहां के शाही खजाने और सिंहासन पर कब्जा कर लिया।

बाबर ने खुद को बादशाह घोषित किया और अपना नाम खुतबे में पढ़वाया। दिल्ली के जामा मस्जिद में उसके नाम की घोषणा से नई शुरुआत हुई। अब भारत में सल्तनत काल खत्म हो चुका था और मुगल युग आया। दिल्ली की गलियों में एक नए सुल्तान के स्वागत की हलचल मची थी।

पानीपत की पहली लड़ाई

बाबर की जीत का सबसे बड़ा कारण उसकी युद्ध करने की आधुनिक तकनीक थी। उसने पहली बार भारतीय युद्ध में तोपों और बारूद का इस्तेमाल किया था।

इब्राहिम लोदी के हाथी तोपों की आवाज सुनकर अपनी ही सेना को कुचलने लगे। बाबर ने तुलुगमा नाम की खास युद्ध रणनीति का बखूबी इस्तेमाल किया था।

उसने लोदी की एक लाख की सेना को मुट्ठी भर सैनिकों से हराया। इस युद्ध ने साबित किया कि वीरता के साथ तकनीक बहुत जरूरी है। दिल्ली का सिंहासन अब पूरी तरह से बाबर के नियंत्रण में आ गया।

मुगल साम्राज्य की नींव

बाबर के दिल्ली संभालने के साथ ही एक विशाल साम्राज्य का उदय हुआ। यह साम्राज्य आगे चलकर कला और वास्तुकला के लिए दुनिया में मशहूर हुआ। मुगलों ने भारत में प्रशासन की एक नई और मजबूत व्यवस्था शुरू की।

दिल्ली अब केवल एक शहर नहीं बल्कि मुग़ल सत्ता का केंद्र बनी। बाबर ने आगरा को अपनी राजधानी बनाया लेकिन दिल्ली का महत्व बना रहा।

उसने यहां के बाग-बगीचों और इमारतों में काफी ज्यादा रुचि दिखाई थी। मुगल शासन ने भारतीय संस्कृति में एक नया और अनोखा मिश्रण पैदा किया।

खुद बादशाह की जुबानी दिल्ली की पहली झलक

बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में भारत और दिल्ली का जिक्र किया है। उसने यहां की गर्मी और धूल का जिक्र बड़े ही रोचक अंदाज में किया।

उसे भारत के फल और यहां की प्राकृतिक सुंदरता बहुत पसंद आई थी। उसने दिल्ली के पुराने किलों और इमारतों का बारीकी से निरीक्षण किया।

बाबरनामा से हमें उस समय के दिल्ली के सामाजिक जीवन की जानकारी मिलती है। वह केवल एक योद्धा नहीं बल्कि एक बेहतरीन लेखक और पारखी भी था। उसके शब्दों में दिल्ली एक महान लेकिन अव्यवस्थित शहर जैसा दिखता था।

कांटों भरा था दिल्ली का ताज

दिल्ली का तख्तो-ताज संभालना बाबर के लिए इतना आसान भी नहीं था। उसे राजपूत राजाओं और बचे हुए अफगान सरदारों से कड़ी चुनौती मिली।

मेवाड़ के राणा सांगा ने बाबर के शासन को कड़ी टक्कर दी थी। बाबर को अपने ही सैनिकों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा था। उसके सैनिक भारत की भीषण गर्मी से डरकर वापस जाना चाहते थे।

लेकिन बाबर ने अपनी बातों से सैनिकों में नया जोश भर दिया। उसने शराब न पीने की कसम खाई और जिहाद का नारा दिया। इससे उसकी सेना दोबारा संगठित होकर युद्ध के लिए तैयार हो गई।

1526 के बदलाव का भारत पर असर

साल 1526 की इस घटना ने भारत को एक नई पहचान और वास्तुकला दी। मुगल काल में ताजमहल और लाल किला जैसी महान इमारतें बनीं।

भारतीय खाना, संगीत और पहनावा भी मुगल संस्कृति से काफी ज्यादा प्रभावित हुआ। व्यापार और अर्थव्यवस्था के मामले में भी भारत काफी मजबूत होता गया।

मुगल साम्राज्य ने करीब 300 साल तक भारत पर अपना शासन किया। बाबर की उस एक जीत ने दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था। आज भी 1526 का साल इतिहास की किताबों में स्वर्ण अक्षरों में है।

27 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास में हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 27 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 27 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-

विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 395: ऐलिया यूडोक्सिया ने बीजान्टिन सम्राट अर्काडियस से विवाह किया।

  • 629: शाहबाज ने ससानियन साम्राज्य के सिंहासन पर कब्जा किया, लेकिन शासन केवल 40 दिन चला।

  • 1521: फिलीपींस में मोक्टन की लड़ाई के दौरान पुर्तगाली खोजकर्ता फर्डिनेंड मैगलन की हत्या हुई।

  • 1522: इटालियन युद्ध में स्पेन की संयुक्त सेना ने फ्रांसीसी और वेनिस की सेना को हराया।

  • 1526: मुगल शासक बाबर ने दिल्ली का तख्तो-ताज संभाला।
  • 1662: नीदरलैंड और फ्रांस के बीच महत्वपूर्ण सैन्य संधि पर हस्ताक्षर किए गए।

  • 1667: कवि जॉन मिल्टन ने अपनी प्रसिद्ध रचना 'पैराडाइज लॉस्ट' के अधिकार मात्र £10 में बेचे।

  • 1749: लंदन के ग्रीन पार्क में जॉर्ज फ्रीडरिक हैंडल के 'आतिशबाज़ी संगीत' का पहला प्रदर्शन हुआ।

  • 1773: ब्रिटिश संसद ने विवादास्पद 'चाय अधिनियम' (Tea Act) पारित किया।

  • 1777: रिजफील्ड की लड़ाई में ब्रिटिश सेना ने अमेरिकी पैट्रियट मिलिशिया को हराया।

  • 1807: फ्रांसीसी सेना ने 6 सप्ताह की लंबी घेराबंदी के बाद दानज़िग शहर पर कब्जा किया।

  • 1810: लुडविग वान बीथोवेन ने अपनी सबसे प्रसिद्ध पियानो रचना 'फ़ुर एलिस' का निर्माण किया।

  • 1865: मिसिसिपी नदी पर स्टीमबोट 'सुल्ताना' में विस्फोट हुआ, जिसमें लगभग 1,800 लोगों की मौत हुई।

  • 1870: एंटोनियो गुज़मान ब्लैंको ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति के रूप में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया।

  • 1941: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सेना ने यूनान की राजधानी एथेंस पर कब्जा कर लिया।

  • 1942: अमेरिका के ओकलाहोमा प्रांत में आए भयानक तूफान के कारण 100 लोग मारे गए।

  • 1961: नासा ने गामा किरणों के रिसर्च के लिए अंतरिक्ष में 'एक्सप्लोरर 11' सैटेलाइट लॉन्च किया।

  • 1961: सिएरा लियोन ने यूनाइटेड किंगडम से आजादी पाई और मिल्टन मारगाई पहले प्रधानमंत्री बने।

  • 1967: मॉन्ट्रियल में 'एक्सपो 67' विश्व मेले का उद्घाटन हुआ, जिसमें 5 करोड़ से ज्यादा लोग पहुंचे।

  • 1993: जाम्बिया की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के सदस्य विमान दुर्घटना में मारे गए।

  • 1999: यूनेस्को ने कोरियाई लोक गायक के नाम पर नए पुरस्कार 'अरिरंग' की घोषणा की।

  • 2005: दुनिया के सबसे बड़े यात्री विमान एयरबस ए-380 ने फ्रांस से अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरी।

  • 2006: न्यूयॉर्क में नए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (फ्रीडम टॉवर) का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हुआ।

  • 2008: मोरक्को की एक गद्दा फैक्ट्री में भीषण आग लगने से 55 लोगों की जान चली गई।

  • 2011: विवादों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपना मूल जन्म प्रमाण पत्र सार्वजनिक किया।

  • 2012: ओसामा-बिन-लादेन का परिवार पाकिस्तान छोड़कर सऊदी अरब चला गया।

  • 2014: पोप फ्रांसिस ने एक ही समारोह में दो पूर्व पोपों (जॉन XXII और जॉन पॉल II) को संत घोषित किया।

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