समझें पूरा मामला...
- 1992 में दंपती पर अंधाधुंध फायरिंग हुई।
- केस में 5 आरोपी थे, अब केवल 1 जीवित।
- 85 वर्षीय दीप राय को कोर्ट ने दोषी ठहराया।
- बुजुर्ग को सहारा देकर जेल भेजा गया।
- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया।
वैशाली में 1992 के जानलेवा फायरिंग केस में कोर्ट ने 85 वर्षीय दीप राय को दोषी ठहराया। बुजुर्ग को शारीरिक सहारे के बाद जेल भेजा गया। 5 आरोपियों में केवल वह जीवित बचे थे। सोशल मीडिया पर उनका कोर्ट ले जाने का वीडियो वायरल हुआ।
34 साल पुराना फायरिंग मामला
वैशाली जिले के जुड़ावनपुर में 1992 में एक दंपत्ति पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। उस समय पांच आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। हमले की वजह पुरानी दुश्मनी बताई गई थी। पुलिस जांच के बाद 1993 में आरोप पत्र अदालत में दायर किया गया था।
केवल एक आरोपी बचा
34 साल की लंबी सुनवाई के बाद 5 में से चार आरोपियों की मौत हो गई। अब केवल दीप राय जीवित बचे थे। उनकी उम्र 85 वर्ष है। बुजुर्ग की शारीरिक स्थिति कमजोर थी।
कोर्ट में दोषी ठहराया गया
वैशाली कोर्ट के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने सुनवाई के बाद दीप राय को दोषी ठहराया। उन्हें आईपीसी की धारा 147, 148, 307 और आर्म्स एक्ट 27 के तहत दोषी पाया गया।
सहारा देकर जेल भेजा गया
दीप राय को कोर्ट परिसर से सहारा देकर जेल ले जाया गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। बुजुर्ग की ढलती उम्र और कमजोर शारीरिक स्थिति के बावजूद न्यायालय ने सजा सुनाई।
सजा की घोषणा
कोर्ट ने दोषी को सजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सजा की अवधि का ऐलान 2 जून को किया जाएगा। यह मामला न्यायपालिका की लंबी प्रक्रिया और पुराने अपराधों की सुनवाई का उदाहरण है। जानलेवा हमला | बिहार

