NEWS IN SHORT
- अरुण देव गौतम को मिल सकती है पूर्णकालिक डीजीपी की जिम्मेदारी।
- यूपीएससी ने छत्तीसगढ़ सरकार से डीजीपी नियुक्ति पर नाराजगी जताई।
- अरुण देव गौतम का कार्यकाल रहा सफल, सरकार पूरी तरह से संतुष्ट।
- डीजीपी के लिए पैनल में अरुण देव गौतम और हिमांशु गुप्ता के नाम।
- 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु गुप्ता को इंतजार करना पड़ सकता है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ सरकार वर्तमान अरुण देव गौतम के कामों से पूरी तरह से संतुष्ट है। इसीलिए पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें ही पूर्णकालिक डीजीपी की जिम्मेदारी सौपी जाएगी। हालांकि लिस्ट में दूसरा नाम 1994 बैच के आईपीएस हिमांशु गुप्ता का है। लेकिन पीएचक्यू और मंत्रालय के अधिकारियों की बातों से लग रहा कि अभी उन्हें और इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि आदेश जारी होने के बाद ही अंतिम मुहर लगेगी।
यूपीएससी ने जताई है नाराजगी
दरअसल संघ लोक सेवा आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर पूछा था कि अब तक राज्य में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। आयोग ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए जवाब तलब किया था। जिसके बाद यह प्रक्रिया की जा रही है।
पैनल में दो नाम
यूपीएससी ने छत्तीसगढ़ सरकार को डीपीसी के लिए दो आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। इनमें 92 बैच के आईपीएस अफसर अरुण देव गौतम और 94 बैच के आईपीएस हिमांशु गुप्ता का नाम शामिल था। तीसरे नाम पर 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह का नाम चल रहा था लेकिन अंतिम समय पैनल में शामिल नहीं किया।
एक साल से प्रभारी की जिम्मेदारी
अशोक जुनेजा चार फरवरी 2025 को छग के डीजीपी पद से रिटायर हुए थे। उसके बाद राज्य सरकार ने अरुण देव गौतम को प्रभारी डीजीपी बनाया था। जो सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उलंल्घन था, किसी भी राज्य को प्रभारी डीजीपी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट के आदेश में इस बात का उल्लेख है कि ऐसा होने पर इसकी जिम्मेदारी राज्य शासन की होगी।
सफल कार्यकाल मान रही सरकार
अरुण देव गौतम को डीजीपी का प्रभार मिले एक साल हो चुका है। सरकार का मानना है कि बीते एक साल में उनका कार्यकाल बेहतर रहा है। खासकर छग पुलिस का केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल रहा। जिसके कारण प्रदेश में सशस्त्र माओवाद समाप्त हुआ। इसका इनाम भी आईपीएस अरुण देव गौतम को मिल सकता है।
पुराना मामला पड़ा भारी
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी को तेज तर्रार माना जाता है। लेकिन वे अरुण देव गौतम से 2 बैच जूनियर हैं। इसके अलावा धमतरी के एक कारोबारी द्वारा लगाया गया आरोप की चर्चा खूब हो रही है। हालांकि सरकार के आदेश के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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