News In Short
- 2019 से 2023 तक का 48 माह का एरियर्स देने के आदेश।
- 6% वार्षिक ब्याज के साथ करना होगा भुगतान।
- 90 दिनों के भीतर पूरी राशि चुकाने का निर्देश।
- ग्रेच्युटी तय करने में सरकार का मनमाना नियम निरस्त।
- अब Payment of Gratuity Act के फार्मूले से मिलेगा भुगतान।
News In Detial
JABALPUR. मध्य प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी कार्यकर्ताओं को जबलपुर हाईकोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 2019 से 2023 तक का बकाया मानदेय 6% ब्याज के साथ 90 दिनों में देने और ग्रेच्युटी का भुगतान कानून के तय फार्मूले के अनुसार करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
चार साल के बकाया पर हाईकोर्ट की सख्ती
जबलपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए मध्य प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत प्रदान की है।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि जून 2019 से जून 2023 के बीच जो बढ़ा हुआ मानदेय कार्यकर्ताओं को नहीं दिया गया, वह उनका वैधानिक अधिकार है।
अदालत ने यह भी माना कि इतने लंबे समय तक भुगतान न होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि इससे कार्यकर्ताओं के अधिकारों का हनन भी हुआ है। इस आदेश के बाद अब राज्य सरकार पर यह बाध्यता आ गई है कि वह चार वर्षों का पूरा बकाया तत्काल प्रभाव से चुकाए।
90 दिन में भुगतान, 6% ब्याज भी देना होगा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए कहा कि 48 महीने का पूरा एरियर्स अधिकतम 90 दिनों के भीतर कार्यकर्ताओं को दिया जाए।
खास बात यह है कि कोर्ट ने केवल मूल राशि के भुगतान तक ही आदेश को सीमित नहीं रखा, बल्कि इस देरी को अनुचित मानते हुए 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश भी दिया है।
इसका मतलब यह है कि कार्यकर्ताओं को अब न सिर्फ उनका रुका हुआ पैसा मिलेगा, बल्कि उस पर ब्याज भी मिलेगा। यह आदेश सरकार की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी लापरवाही पर अंकुश लगाने वाला भी माना जा रहा है।
कैसे रुका था वेतन बढ़ोतरी का लाभ
याचिकाकर्ताओं की ओर अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1500 रुपए और सहायिकाओं के मानदेय में 750 रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी।
यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं की आय में सुधार लाने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन उसी समय तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने राज्य के हिस्से से दी जाने वाली राशि में कटौती कर दी, जिससे यह बढ़ोतरी कागजों तक सीमित रह गई और कार्यकर्ताओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। इस निर्णय के कारण कार्यकर्ताओं का वेतन पहले जैसा ही बना रहा।
मोहन सरकार ने लागू किया, पर एरियर्स नहीं मिला
अधिवक्ता के अनुसार, बाद में शिवराज सिंह चौहान सरकार ने केंद्र द्वारा घोषित बढ़े हुए मानदेय को लागू करने का कोर्ट में आश्वासन दिया था। मोहन सरकार ने साल 2023 में इस बड़े हुए मानदेय को लागू भी कर दिया। लेकिन सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर रहा कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच का जो अंतराल था, उस अवधि का एरियर्स कभी भी कार्यकर्ताओं को नहीं दिया गया।
यानी कार्यकर्ताओं को बढ़ा हुआ वेतन तो आगे मिलने लगा, लेकिन पिछले चार वर्षों का उनका बकाया लगातार लंबित रहा। इसी लंबित एरियर्स को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। जिस पर अब जस्टिस विशाल धगत की सिंगल बेंच ने स्पष्ट और निर्णायक आदेश पारित किया है।
ग्रेच्युटी पर भी कोर्ट का बड़ा फैसला
इस मामले में हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन और भुगतान के मुद्दे पर भी एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार द्वारा ग्रेच्युटी के लिए एक लाख या 1.25 लाख रुपए की एक निश्चित सीमा तय कर दी गई थी, जो कानून के अनुरूप नहीं है।
अधिवक्ता के अनुसार, यह व्यवस्था पूरी तरह मनमानी और गैरकानूनी थी, क्योंकि ग्रेच्युटी का निर्धारण एक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। कोर्ट ने इस मनमाने आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी का भुगतान केवल कानून के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
अब कानून के फार्मूले से तय होगी ग्रेच्युटी
अधिवक्ता के अनुसार, अब ग्रेच्युटी का निर्धारण “पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट” के तय फार्मूले के आधार पर किया जाएगा। इस फार्मूले में कर्मचारी के अंतिम मासिक वेतन, उसकी कुल सेवा अवधि और 26 कार्य दिवसों के आधार पर गणना की जाती है।
इसका सीधा असर यह होगा कि पहले जहां कार्यकर्ताओं को मात्र एक लाख या 1.25 लाख रुपए तक सीमित ग्रेच्युटी मिल रही थी, अब वही राशि बढ़कर लगभग 2.5 लाख से तीन लाख रुपए तक पहुंच सकती है। यह बदलाव कार्यकर्ताओं के लिए रिटायरमेंट के समय एक बड़ी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
लाखों महिलाओं को मिलेगा सीधा फायदा
हाईकोर्ट का यह फैसला प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी कार्यकर्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। लंबे समय से लंबित आर्थिक अधिकार अब उन्हें ब्याज सहित मिलने वाले हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
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